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रथयात्रा 2018: इन दिनों बीमार चल रहे हैं भगवान जगन्नाथ, इस तरह चल रहा है उनका इलाज

Wed, 11 Jul 2018 12:38 PM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
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jagannath temple
भगवान जगन्नाथ पिछले कुछ दिनों से बीमार हैं जिसके चलते वह इन दिनों आराम फरमा रहे हैं। जी हां ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को भगवान जगन्नाथ को स्नान कराने की परंपरा है, जिसके बाद से वह बीमार हैं और उनके भक्त उनकी सेवा कर रहे हैं। आराम के लिए 15 दिन तक मंदिर पट को भी बंद कर दिया गया है जिससे कि वह जल्दी ठीक हो जाएं। इस वक्त उन्हें चटपटी चीजों के बजाय मौसमी फल और परवल का जूस दिया जा रहा है। आप सोच रहे होंगे कि भला भगवान कैसे बीमार हो सकते हैं? आइए हम आपको बताते हैं...
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पुराणों में इस बात का जिक्र है कि राजा इंद्रदुयम्न अपने राज्य में भगवान की प्रतिमा बनवा रहे थे, जिसे शिल्पकार बीच में ही अधूरा छोड़कर चले गये थे। यह देखकर राजा परेशान होकर चिल्लाने लगे और तभी उन्हें भगवान ने दर्शन देकर कहा, 'विलाप न करो मैंने नारद को वचन दिया था कि बालरूप में इसी आकार में पृथ्वीलोक पर विराजूंगा।’ 
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भगवान ने राजा इंद्रदुयम्न को 108 घट के जल से उनका अभिषेक करने का आदेश दिया। उस वक्त ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा थी। बस तभी से यह मान्यता चली आ रही है कि किसी बच्चे को अगर ठंडे पानी से स्नान कराया जाएगा तो उसका बीमार पड़ना स्वाभाविक है। इसलिए ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा से अमावस्या तक बीमार बच्चे के रूप में भक्त भगवान की सेवा करते हैं। इस दौरान भगवान को आयुर्वेदिक काढ़े का भोग लगाया जाता है।

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भगवान के बीमार होने की वजह से 15 दिनों तक मंदिर में कोई घंटे आदि नहीं बजते। इस दौरान अन्न का भी कोई भोग नहीं लगाया जाता। प्रसाद के रूप में आयुर्वेदिक काढ़ा अर्पित किया जाता है। यहां तक की मंदिर में भगवान की बीमारी की जांच करने के लिए हर दिन वैद्य भी आते हैं। काढ़े के अलावा भगवान को फलों का रस भी दिया जाता है।
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Jagannath
बता दें, इस साल ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा 27 जून को थी। तभी से भगवान बीमार है और उनका इलाज चल रहा है। 14 जुलाई को भगवान स्वस्थ्य हो जाएंगे और मंदिरों के पट खुल जाएंगे। इसके साथ ही भगवान के नव जोबन रुप के भी दर्शन होंगे। उन्हें विशेष भोग लगाया जाएगा। 14 जुलाई को भगवान अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलराम के साथ भक्तों को दर्शन देने के लिए मंदिर से निकलेंगे। यानी उस दिन जगन्नाथ यात्रा निकलेगी। जहां वे अपनी मौसी के घर जाएंगे और नौ दिन तक वहीं रहेंगे और उसके बाद वापस अपने मंदिर में लौट आएंगे।
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