आम तौर पर भगवान के रंग-रूप में बदलाव करने का दुस्साहस लोग नहीं करते, कुछ महीने पहले हनुमान जी का मूड बदला गया है और इस पर ख़ासी चर्चा हो रही है। ये बदलाव काफ़ी हिट हुआ है लेकिन कई लोगों को रामभक्त हनुमान का यह रुप पसंद नहीं आ रहा है, उन्हें लगता है कि यह हनुमान जी की शास्त्रों में वर्णित विनीत छवि के ठीक उलट है।
देश के कई हिस्सों में गाड़ियों के पीछे वाले शीशे पर रौद्र रूप वाले हनुमान जी का स्टिकर दिखाई देने लगा है। राम की सेवा का भाव दिखाने वाले हनुमान का आक्रामक वर्ज़न लोगों को पसंद आ रहा है। हनुमान जी के इस रौद्र रूप के ज़रिए क्या कोई संदेश देने की कोशिश की जा रही है? ख़ास तौर पर उग्र हिंदुत्व की राजनीति के दौर में
क्या ज़रूरत थी इस बदलाव की?
केरल के नामी चित्रकार रवि वर्मा ने हिंदू देवी-देवताओं को मानवीय रूप दिया। कथाओं के आधार पर उन्हें कुछ ऐसा रूप गढ़ा कि आम लोग ख़ुद को देवी-देवताओं से जुड़ा महसूस कर सकें। हममें से ज़्यादातर लोगों ने भी पर्वत उठाने वाले और राम-दरबार में हाथ जोड़कर बैठे हनुमान को ही भगवान की तरह देखा है फिर ये खुले केश और आंखों से अंगारे बरसाने वाले हनुमान को गढ़ने की ज़रूरत क्या थी?
ये संयोग ही है कि हनुमान को नया रूप देने वाले कलाकार भी केरल के ही हैं। उनका नाम करन आचार्य है, वे कहते हैं, ''मैंने तो ये ऐसे ही बना दिया था, जब बनाया था तब पता भी नहीं था कि ये इतना पॉपुलर हो जाएगा। करन आस्तिक हैं और वे भगवान हनुमान में गहरी श्रद्धा रखते हैं, हर रोज़ हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं।
करन कहते हैं, ये पोस्टर मैंने क़रीब तीन साल पहले बनाया था. ऐसे ही बनाया था, अपने दोस्तों के लिए। उन्हें कुछ अलग चाहिए था। मैंने हनुमान को चुना। हालांकि करन कहते हैं कि मैंने हनुमान को आक्रामक या गुस्से को नहीं दिखाया बल्कि इसमें एटिट्यूड है।
अब जबकि उनका स्टिकर देश भर में इतना पसंद किया जा रहा है तो कैसा लगता है? इस सवाल के जवाब में करन कहते हैं, अब उतना नया नहीं लगता लेकिन शुरू-शुरू में जब मेरे कुछ दोस्तों ने फोन करके बताया कि उन्होंने मेरा बनाया हनुमान कार पर देखा तो बहुत अच्छा लगा था।
एक मज़ेदार वाकये का ज़िक्र करते हुए करन कहते हैं कि एक बार मेरा भाई स्कूटर बनवाने गया, वहां दुकान वाले ने रिपेयर करने के बाद कहा कि एक नया स्टिकर आया है, लगा लो। ये वही स्टिकर था जो मैंने बनाया था।