दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक और आध्यात्मिक कुंभ मेला एक दिन बाद यानि 15 जनवरी 2019 से प्रयाग में शुरू हो जाएगा। देश-विदेश से करोड़ों की संख्या में तीर्थयात्री संगम के पवित्र जल में डुबकी लगाएंगे। कुंभ मेले में 3 नदियों का संगम, नागा संन्यासी , लाखों की संख्या में कल्पवासी और संगम की रेती में बने टेंट की भव्यता देखने लायक होती है। इसके अलावा कुंभ मेले में कई सदियों पहले आने वाले देश -विदेश से तीर्थ यात्रियों का पूरा लेखा जोखा रखने वाले पंडा समाज भी सभी का ध्यान अपनी तरफ खींचता है। सदियों पुरानी वंशावली को खोजने के मामले में तो प्रयाग के पंडों के सामने गूगल भी फेल हो जाता है। इन पंडा समाज के पास उन सभी का लेखा-जोखा मिल जाता है तो कभी न कभी सदियों सालों पहले प्रयाग आए हुए होंगे। प्रयागराज कुंभ 2019 के अवसर पर आज हम इन पंडों और उनके बही खाते के बारे में पूरी जानकारी देंगे जिसे जानकार आप हैरान रह जाएंगे।
7 पीढ़ियों की वंशावली मौजूद होती है इनके पास
- प्रयाग के पंडा समाज के पास आज भी राजा-महाराज और मुस्लिम शासकों समेत आम लोगों के सैकड़ों सालों की वंशावली के दस्तावेज सुरक्षित है।
- इन दस्तावेजों में परिवार के सभी सदस्यों के दुर्लभ आंकड़ें मौजूद होते हैं।
- लाखों लोगों के दस्तावेजों को बहुत ही सरल और वैज्ञानिक तरीके से संभालकर रखा जाता है। इनके लेखा-जोखा की प्रमाणिकता एकदम सटीक होती है।
पंडों के होते हैं खास निशान और झंडे
- प्रत्येक पंडों का एक खास निशान या झंडा होता है जो कभी भी नहीं बदलता। पीढ़ी दर पीढ़ी इन्हीं झंडों से इनकी पहचान होती है।
- प्रयागराज पंडा समाज में झंडे वाले पंडा, शंख वाले पंडा, तुमड़ी वाले पंडा , डमरू वाले पंडा, लौकी वाले पंडा, डंडे वाले पंडा, घंटी वाले पंडा जैसे निशान वाले झंडे जरूर देखने को मिलते हैं।
- यही निशान पंडा समाज के प्रतीक चिन्ह होते हैं। इनसे ही तीर्थ पुरोहितों के कुल के बारे में और किसी व्यक्ति के पूर्वजों के तीर्थ पुरोहित का पता चलता है। परिवार के 7 पीढ़ियों की पूरी जानकारी इनके पास मौजूद होती है।
- अगर आपको अपने तीर्थ पुरोहित के झंडे का निशान पता हो जाए। उसके बाद आपके सात पुश्तों की वंशावली आसानी से मिल जाएगी।
- इन तीर्थ पुरोथितों के पास नया जिला बनने की स्थिति में भी तीर्थयात्रियों के दस्तावेज मूल जिला वाले पुरोहित के पास ही रहते हैं।
पंडों के पास 500 वर्षो की वंशावलियों है सुरक्षित
- प्रयाग के पंडों के पास 500 वर्षों की वंशावलियों के ब्योरे बही खातों में पूरी तरह सुरक्षित हैं, जिसे हम कभी भी देख सकते हैं।
- इस पंडों के पास आज भी महात्मा गांधी, सरदार पटेल, पंडित जवाहर लाल नेहरू, डाक्टर राजेंद्र प्रसाद, आचार्य नरेंद्र देव, सुचेता कृपलानी के वंशावली की दस्तावेज मौजूद है।
- पलभर भी ही ये पंडे अपने बही खाते से अपने यजमान की सारी जानकारी बता देते हैं।
- पंडा समाज तीर्थ यात्रियों के लेखे जोखे के विवरण के लिए तीन दस्तावेज तैयार करते हैं। पहली दस्तावेज घर में सुरक्षित रखते हैं।
- दूसरे दस्तावेज यजमानों को दिखाई जाती है। तीसरी तीर्थ स्थल पर लोहे के संदूक में रखी जाती है।
भगवान राम के पंडों के हैं यहां वंशज
- ऐसे पंडों का वंशज आज भी यहां पर मौजूद है जिन्होंने भगवान राम के पिता का पिंडदान किया था और उन्हें रघुकुल का पुरोहित माना गया।
अकबर ने पंडों को दान किए थे 250 बीधा जमीन
- मुगल शासक अकबर ने तीर्थ पुरोहित चंद्रभान और किशनराम को 250 बीघा भूमि संगम तट पर मुफ्त में दी थी। इनकी ही भूमि पर हर साल कल्पवासी कल्पवास करते हैं। जिनका आदेश ये पंडे देते हैं।
- आज करीब हजारों पंडा परिवार संगम क्षेत्र में अपनी आजीविका चला रहे हैं।
- 1957 की गदर क्रांति के दौरान रानी लक्ष्मी बाई 3 दिनों तक तीर्थ पुरोहित के घर बिताई थी जिसकी ब्योरा इन पंडों के पास आज भी सुरक्षित है।