फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शरद पूर्णिमा की रात क्यों जागते हैं भक्त? कोजागर पूजा से जुड़ी लक्ष्मी कृपा की मान्यता जानें

Sun, 04 Oct 2026 10:41 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

शरद पूर्णिमा की रात को धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है। मान्यता है कि इस रात कोजागर पूजा करने और जागरण करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। जानते हैं इससे जुड़ी पौराणिक मान्यता और महत्व।
विज्ञापन
sharad purnima - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

शरद पूर्णिमा को हिंदू धर्म में बेहद खास माना जाता है। आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व को कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और यह देखती हैं कि कौन जागकर उनकी आराधना कर रहा है। इसी वजह से इस रात जागरण और कोजागर पूजा की परंपरा मानी जाती है। कहा जाता है कि जो भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं, उन्हें धन-धान्य, सुख-समृद्धि और सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है।

विज्ञापन

शरद पूर्णिमा की रात जागने की क्या है मान्यता? - फोटो : Freepik

शरद पूर्णिमा की रात जागने की क्या है मान्यता?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं। मान्यता है कि मां लक्ष्मी अपने भक्तों की भक्ति और जागरण को देखती हैं। इसी से जुड़ी परंपरा में लोग रात में जागकर मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करते हैं और भजन-कीर्तन करते हैं। कहा जाता है कि इस रात जागरण करने वाले भक्तों पर मां लक्ष्मी की विशेष कृपा बनी रहती है। यही वजह है कि शरद पूर्णिमा की रात को जागने की परंपरा को कोजागर व्रत से भी जोड़ा जाता है। 'कोजागर' शब्द का संबंध 'कौन जाग रहा है' से माना जाता है।

कोजागर पूजा का मां लक्ष्मी से क्या संबंध है? - फोटो : adobe

कोजागर पूजा का मां लक्ष्मी से क्या संबंध है?
शरद पूर्णिमा को कई स्थानों पर कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन रात के समय मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए भक्त घर की साफ-सफाई करते हैं, दीपक जलाते हैं और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि मां लक्ष्मी को स्वच्छ और सुंदर स्थान प्रिय हैं। इसलिए कोजागर पूजा से पहले घर की साफ-सफाई और मुख्य द्वार को सजाने की परंपरा भी कई जगहों पर देखने को मिलती है।

शरद पूर्णिमा पर दीपक जलाने की परंपरा - फोटो : अमर उजाला

शरद पूर्णिमा पर रात में दीपक जलाने की परंपरा
शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दीपक का प्रकाश शुभता और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। कई लोग इस रात घर के अलग-अलग हिस्सों में भी दीपक जलाकर मां लक्ष्मी का स्वागत करते हैं। कहा जाता है कि रात में दीप प्रज्वलित करके मां लक्ष्मी का ध्यान और पूजन करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।

lakshmi - फोटो : adobe stock

शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की पूजा कैसे करें?
इस दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। शाम के समय मां लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर को पूजा स्थान पर स्थापित करें। इसके बाद दीपक जलाकर देवी लक्ष्मी का विधिवत पूजन करें। रात में मां लक्ष्मी को फल, मिठाई और अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग अर्पित किया जा सकता है। इसके बाद देवी की आरती और मंत्र जाप करें। कई स्थानों पर भक्त रात में जागरण करते हुए भजन-कीर्तन भी करते हैं।

शरद पूर्णिमा पर लक्ष्मी कृपा के लिए क्या करें? - फोटो : adobe stock

शरद पूर्णिमा पर लक्ष्मी कृपा के लिए क्या करें?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन घर को स्वच्छ रखना और शाम के समय दीपक जलाना शुभ माना जाता है। मुख्य द्वार पर दीपक जलाकर मां लक्ष्मी का स्वागत किया जाता है। इसके अलावा पूजा के दौरान मां लक्ष्मी को कमल का फूल, सफेद या लाल रंग के पुष्प और मिठाई अर्पित करने की परंपरा भी है। मान्यता है कि श्रद्धा से की गई पूजा और जागरण से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और भक्तों को सुख, समृद्धि तथा सौभाग्य का आशीर्वाद देती हैं।

विज्ञापन

क्यों खास है शरद पूर्णिमा की रात? - फोटो : adobe

क्यों खास है शरद पूर्णिमा की रात?
शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं में दिखाई देता है। धार्मिक मान्यताओं में इस रात की चांदनी को विशेष महत्व दिया गया है। इसी कारण शरद पूर्णिमा की रात पूजा, जागरण और चंद्र दर्शन की परंपरा सदियों से चली आ रही है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें