अनामिका अंगुली
अनामिका अंगुली से तिलक लगाना मानसिक शक्ति को प्रबल बनाता है। इस अंगुली का संबंध सूर्य से है इसलिए इस अंगुली से तिलक लगाना व्यक्ति के आज्ञा चक्र को जागृत करता है। अनामिका से तिलक लगाना व्यक्ति के मान-सम्मान को बढ़ाता है। आज्ञा चक्र को जागृत करने के लिए ही पूजा पाठ में अक्सर यह अंगुली प्रयुक्त होती है। शास्त्रों में अनामिका यानी रिंग फिंगर से चंदन लगाना शुभ फल देने वाला कहा गया है।
अंगूठा
अंगूठे का संबंध शुक्र से है। शुक्र ग्रह धन-वैभव के कारक हैं, इसलिए अंगूठे से चंदन का तिलक लगाने से धन-संपत्ति बढ़ती है व स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है। मान्यता है कि किसी रोगी को नियमित अंगूठे का प्रयोग करते हुए चंदन तिलक लगाने से उसे स्वास्थ्य लाभ मिलता है। मस्तक पर अंगूठे से रोली-कुमकुम का तिलक व अक्षत लगाना विजय प्रतीक है। अक्सर विजय पर्व दशहरा, रक्षा बंधन पर बहनें अपने भाई की विजय कामना के लिए इसी तरह का तिलक लगाती हैं।
तर्जनी अंगुली के अशुभ फल
तिलक लगाने के लिए तर्जनी यानी अंगूठे और मध्यमा अंगुली के बीच की अंगुली का प्रयोग केवल मृत व्यक्ति के लिए किया जाता है ताकि मृतक की आत्मा को मोक्ष प्राप्त हो जाए। तर्जनी का प्रयोग करना असमय मृत्यु की ओर ले जाता है। अत: किसी को भी तिलक लगाते समय उचित अंगुली का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।