पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों में मंत्र और श्लोकों का उच्चारण और जाप अवश्य किया जाता है। मंत्र और श्लोक साधक को आध्यात्म की ओर यानि ईश्वर के समीप ले जाने का कार्य करते हैं। मंत्र एवं श्लोक को पढ़ने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है। दोनों की ही रचना संस्कृत भाषा में मिलती हैं और लगभग इनका उच्चारण भी एक समान होता है। इसी कारण श्लोक और मंत्र जप करने वाले कई लोगों को भी यही लगता है कि ये दोनों एक ही हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि इन दोनों में बहुत अंतर है। ये दोनों ही अलग-अलग विषय हैं। तो चलिए जानते हैं कि मंत्र व श्लोक दोनों में क्या अंतर है।