फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कुंडली में ऐसे बनता है शनि दोष, ज्योतिष उपाय से जानें कैसे बचें

Sat, 04 Jan 2020 12:38 PM IST
रुस्तम राणा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
शनिदेव - फोटो : shani jayanti
विज्ञापन

शनि एक क्रूर ग्रह है। किसी व्यक्ति के ऊपर इसकी टेढ़ी नजर पड़ जाए तो उस व्यक्ति के जीवन में समस्याओं का भंडार लग जाता है। इसकी चाल धीमी है इसलिए जातकों के जीवन पर इसका असर लंबे समय तक रहता है। जन्म कुंडली में शनि का स्थान यह बताता है कि उसके प्रभाव जातक के ऊपर शुभ पड़ेंगे या अशुभ। क्योंकि अगर कुंडली शनि का स्थान शुभ नहीं होता है तो यह जातक की कुंडली में शनि दोषों का निर्माण करता है जो व्यक्ति के लिए समस्याकारक होता है।कुंडली में 12 भाव होते हैं। ये भाव व्यक्ति के संपूर्ण जीवन की व्याख्या करते हैं। इन भावों में शनि कहां शुभ और कहां अशुभ होता है, ये जानने की कोशिश करते हैं। सबसे पहले कुंडली का चौथा भाव जिसे सुख भाव कहते हैं इस भाव में शनि का होना अच्छा नहीं माना जाता है। यानि यहां शनि की उपस्थिति से व्यक्ति के सुखों में ग्रहण लग जाता है।

विज्ञापन




शनि का राहु और मंगल के साथ होने से दुर्घटना का प्रचंड दुर्योग बनता है। ऐसी स्थिति में जातक को संभल कर वाहन चलाना चाहिए और यात्रा करते समय भी सावधानी बरतनी चाहिए । शनि का सूर्य के साथ संबंध होने से कुंडली में दोष पैदा होता है। इस दोष के कारण पिता-पुत्रों के संबंध खराब रहते हैं। दोनों के बीच मतभेद रहता है। दरअसल शनि देव सूर्य देव के पुत्र हैं और दोनों के बीच शत्रुता का भाव है। शनि का वृश्चिक राशि या चंद्रमा से संबंध होने पर कुंडली में विष योग का निर्माण होता है। इस दोष के कारण व्यक्ति अपने कार्यक्षेत्र में असफल होता है। शनि अगर अपनी नीच राशि मेष में हो तो भी जातक को इसके नकारात्मक फल प्राप्त होते हैं।

शनिवार के दिन करें शनि दोषों से बचने के उपाय
  • प्रत्येक शनिवार को शनि देव का उपवास रखें।
  • शाम को पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं और सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
  • शनि के बीज मंत्र ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः, का १०८ बार जाप करें।
  • काले या नीले रंग के वस्त्र धारण करें।
  • भिखारियों को अन्न-वस्त्र दान करें।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें