सावन महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरियाली तीज व्रत के रुप में मनाया जाता है। सुहागन स्त्रियों के लिए यह व्रत काफी मायने रखता है। इसका कारण यह है कि इसी दिन देवी पार्वती ने भगवान शिव को प्राप्त करने का वरदान पाया था।
पढ़ें,पार्वती को पता नहीं चला और हो गया शिव की पांच बेटियों का जन्म
भगवान शिव और देवी पार्वती ने इस तिथि को सुहागन स्त्रियों के लिए सौभाग्य का दिन होने का वरदान दिया है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन जो सुहागन स्त्रियां सोलह श्रृंगार करके भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करती हैं उनका सुहाग लंबे समय तक बना रहता है।
पढ़ें,ऐसी लड़कियों के वैवाहिक जीवन में आती हैं परेशानियां
इस तीज को कुछ स्थानों पर कज्जली तीज के नाम से भी जाना जाता है। इस तीज से एक दिन पहले नवविवाहित कन्याओं के लिए उनके सुसराल से श्रृंगार सामग्री आती है। महिलाएं इन्हीं से अपना श्रृंगार करके देवी पार्वती की और भगवान शिव की बालू की बनी प्रतिमा की पूजा करती हैं।
इस व्रत में तीन चीजों का त्याग आवश्यक माना जाता है पहला पति से छल कपट, दूसरा झूठ और दुर्व्यवहार, तीसरा परनिंदा।