शास्त्रों में कहा गया है कि व्यक्ति जैसा कर्म करता है उसी अनुसार उसे अगला जन्म मिलता है। यानी आपका अगला जन्म किस योनी में होगा यह आपके इस जन्म के कर्मों पर निर्भर करता है। शास्त्रों और पुराणों में कुछ दिनों को बहुत ही खास बताया गया है।
इनमें भाद्रमास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि भी ऐसी ही है। इस रात भगवान शिव और पार्वती की पूजा की जाती है। ऐसी कथा है कि इसी रात को देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रुप में पाने के लिए रेत का शिवलिंग बनाकर उनका पूजन किया था और इसके बाद भजन, आरती और ध्यान करते हुए रात्रि जागरण किया था।
इससे भगवान शिव को प्रकट होना पड़ा और देवी पार्वती को पत्नी रुप में स्वीकार करने का वरदान देना पड़ा। इसलिए इस रात का शास्त्रों में बड़ा ही महत्व बताया गया है। शास्त्रों में इस दिन कई कार्यों को नहीं करने की सलाह दी गई है, जो इन बातों का ध्यान नहीं रखता है उसे अगले जन्म में नीच योनियों में जाना पड़ता है।