करवाचौथ का व्रत
आमतौर पर विवाहित महिलाएं रखती हैं। मान्यता है कि इस व्रत से पति की आयु लंबी होती
है। लेकिन कुछ स्थानों पर कुंवारी कन्याएं भी करवाचौथ का व्रत रखती है। कुंवारी
कन्याओं द्वारा करवाचौथ का व्रत अपने भाई की लंबी आयु के लिए किया जाता है। इसके
पीछे यह धारणा है कि पति के घर जाने से पहले कन्या अपने पिता और भाई के घर रहती है।
इसलिए कन्याएं इनकी दीर्घायु के लिए व्रत रखती है।
करवाचौथ की एक कथा के
अनुसार एक बार अर्जुन तपस्या के लिए नीलगिरी पर्वत पर गये। काफी समय तक अर्जुन के
नहीं लौटने पर द्रौपदी ने भगवान श्री कृष्ण को याद किया। भगवान कृष्ण ने द्रौपदी को
करवाचौथ व्रत करने की सलाह और विधि बतायी। द्रौपदी ने विधिवत रूप से करवाचौथ का
व्रत रखा जिससे अर्जुन सकुशल तपस्या करके लौट आये।
कृष्ण को द्रौपदी सखा और
भाई मानती थी। कृष्ण के बताई गई विधि के कारण द्रौपदी का अर्जुन से पुर्नमिलन हुआ।
इसलिए कुंवारी कन्याएं भाई की सलामती हेतु करवाचौथ का व्रत रखती है। भाई के लिए रखा
जाने वाला करवाचौथ का व्रत चांद को देखकर नहीं बल्कि तारों को देखकर खोला जाता है।
कुंवारी कन्या अपने भाई के लिए करवाचौथ का व्रत रखती हैं तो उन्हें विवाहित
स्त्रियों की तरह सजने संवरने और पूरा श्रंगार करने की जरूरत नही होती है। इन्हें
सिर्फ भाई की मंगल कामना करते हुए करवा चौथ का व्रत रखना होता है।