कमला पुरूषोत्तम एकादशी बहुत ही दुर्लभ मानी जाती है क्योंकि यह तभी आती है जब अधिक मास यानी मलमास लगता है। मलमास का महीना भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है। इस महीने में श्री कृष्ण की नियमित पूजा करने से अन्य महीनों की अपेक्षा अधिक पुण्य लाभ मिलता है। जिनके लिए पूरे महीने विधिपूर्वक भगवान की पूजा करना कठिन है वह इस माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी एवं कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन व्रत रखकर कृष्ण की पूजा करें तो इससे भी कई गुणा पुण्य लाभ मिल जाता है।
शास्त्रों में कहा गया कि कमला पुरूषोत्तम एकादशी के दिन कांसे के पात्र में भोजन नहीं करना चाहिए। इस दिन मसूर की दाल, चना, शहद, शाक एवं लहसुन, प्याज के सेवन से परहेज रखना चाहिए। इस दिन किसी और का दिया हुआ भोजन भी न करें। आज मीठा भोजन एवं हो सके तो केवल फल खाकर ही रहना चाहिए। जो व्यक्ति इन बातों का पालन करते हुए इस दिन भगवान की पूजा एवं अर्चना करता है उसे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। व्रत के पुण्य से अनजाने में हुए कई पापों से मुक्ति मिलती है।
पुरूषोत्तम एकादशी के विषय में जो कथा मिलती है उसके अनुसार इस व्रत से सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है। एक अन्य कथा के अनुसार एक ब्राह्मण के पुत्र ने इस व्रत के नियमों का पालन करते हुए कमला पुरूषोत्तम एकादशी का व्रत रखा। व्रत के प्रभाव से माता लक्ष्मी उस पर प्रसन्न हुई और वह धनवान बन गया। व्रत के पुण्य से मृत्यु के पश्चात ब्राह्मण के इस पुत्र को भगवान श्री कृष्ण के गोलोक में स्थान प्राप्त हुआ।
इस व्रत में दान का विशेष महत्व है। इस दिन जरूरतमंदों को तिल, वस्त्र, धन एवं अपनी श्रद्धा के अनुसार फल एवं मिठाई दान करना चाहिए। जो लोग व्रत नहीं भी करते हों वह भी इन चीजों का दान करें तो उन पर भी ईश्वर की कृपा बनी रहती है।