सनातन धर्म में चैत्र शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे कामदा एकादशी कहा जाता है, विशेष पुण्यदायी मानी गई है। वर्ष 2026 में यह पावन व्रत 29 मार्च, रविवार के दिन रखा जाएगा। शास्त्रों के अनुसार यह एकादशी सभी पापों का नाश करने वाली और मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा में भोग अर्पित करने का विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धा और नियमपूर्वक अर्पित किए गए भोग से भगवान शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
1. पंचामृत
दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से निर्मित पंचामृत भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। इससे भगवान का अभिषेक करने और भोग लगाने से जीवन में शुद्धता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
2. तुलसी पत्र और मंजरी (एक दिन पहले तोड़कर रखें)
रविवार के दिन तुलसी पत्र तोड़ना शास्त्रों में वर्जित माना गया है। इसलिए कामदा एकादशी से एक दिन पूर्व ही तुलसी के पत्ते और मंजरी तोड़कर स्वच्छ स्थान पर सुरक्षित रख लें। पूजा के समय इन्हें भगवान विष्णु को अर्पित करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
3. मखाने और केसर की खीर
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित होता है, इसलिए चावल की खीर नहीं बनाई जाती। इस दिन मखाने और केसर से बनी खीर भगवान को अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है, जो सात्विकता और समृद्धि का प्रतीक है।
4. फल (विशेषकर केला और नारियल)
भगवान विष्णु को केला प्रिय माना जाता है, जबकि नारियल पूर्णता और समर्पण का प्रतीक है। इनका भोग लगाने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।
5. माखन-मिश्री
यह भोग सरलता और मधुरता का प्रतीक है। माखन-मिश्री अर्पित करने से जीवन में प्रेम, सौहार्द और मानसिक शांति की वृद्धि होती है।
6. सूखे मेवे
काजू, बादाम, किशमिश आदि सूखे मेवे वैभव और ऐश्वर्य के प्रतीक माने जाते हैं। इन्हें माता लक्ष्मी को अर्पित करने से धन-समृद्धि की प्राप्ति की मान्यता है।
7. पीले रंग के भोग और वस्त्र
भगवान विष्णु को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। इस दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करवाना, पीले पुष्प अर्पित करना और केसर या बेसन से बने पीले भोग अर्पित करना विशेष फलदायी माना गया है। यह उपाय भगवान की कृपा प्राप्त करने का सरल और प्रभावशाली माध्यम माना गया है।