भगवान काल भैरव को काशी का कोतवाल कहा जाता है। धार्मिक ग्रंथों में काल भैरव भगवान को शिव जी का रौद्र स्वरूप बताया गया है। इनकी कृपा से जातक को भय और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति प्राप्त होती है। प्रत्येक वर्ष मार्गशीर्ष मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान काल भैरव की जयंती के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान काल भैरव का अवतरण हुआ था। इस बार काल भैरव जयंती 27 नवंबर 2021 दिन शनिवार को पड़ रही है। भगवान काल भैरव को दंडपाणि (जिसके हाथों में दंड हो) कहा जाता है। भक्तों के लिए काल भैरव दयालु, कल्याण करने वाले और अति शीघ्र प्रसन्न होने वाले देव माने जाते हैं, तो वहीं अनैतिक कार्य करने वालों के लिए ये दंडनायक हैं। इनके विषय में धार्मिक मान्यताएं कहती हैं कि यदि इनके भक्तों का कोई अहित करता है तो उसे तीनों लोकों में कहीं भी शरण प्राप्त नहीं होती है। मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि काल भैरव भगवान को प्रसन्न करने हेतु बहुत महत्वपूर्ण होती है। मान्यता है कि यदि आप काल भैरव जयंती के दिन भगवान भैरव की पूजा से जुड़े कुछ उपाय करते हैं तो आपको जीवन की बाधाओं और परेशानियों से छुटकारा मिलता है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। तो चलिए जानते हैं उपाय।