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Kashi Vishwanath: यहां स्थित है भगवान भोलेनाथ का सातवां ज्योतिर्लिंग, जानिए इसका इतिहास और इससे जुड़ी मान्यता

Tue, 07 Dec 2021 07:43 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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श्री काशी विश्वनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला
Jyotirlinga:भगवान भोलेनाथ सभी भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के आधार पर भगवान शिव के प्रतीक के रूप में 12 ज्योतिर्लिंग शमिल हैं। देश के अलग- अलग हिस्सों में ये ज्योतिर्लिंग स्थापित हैं। ऐसा विश्वास है कि इन 12 ज्योतिर्लिंगों में भगवान भोलेनाथ स्वयं विद्यमान रहते हैं। कहते हैं कि भगवान शिव के इन ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिल जाती है और मृत्यु के पश्चात मोक्ष की प्राप्ति होती है। आज भगवान भोलेनाथ का सांत्वन ज्योतिर्लिंग काफी चर्चा में हैं। आइए जानते हैं भगवान शिव के इस ज्योतिर्लिंग के बारे में। हिंदू धर्म के सबसे पवित्र शहर काशी को वाराणसी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है,  भगवान विश्वनाथ यहां ब्रह्मांड के स्वामी के रूप में निवास करते हैं। यह एक ऐसा नगर है जिसके बारे में शिव पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में कहा गया है कि जब तक यह नगर है तब तक सृष्टि का अंत नहीं होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 दिसंबर को काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण करेंगे। आइए जानते हैं इसे जुड़ा इतिहास और मान्यताएं- 
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काशी विश्वनाथ मंदिर - फोटो : a
काशी विश्वनाथ मंदिर 
12 ज्योतिर्लिंगों में से सातवां ज्योतिर्लिंग काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर वाराणसी में गंगा नदी के पश्चिम घाट पर स्थित है।  काशी भगवान शिव और माता पार्वती का सबसे प्रिय स्थान में से एक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि यहां बाबा विश्वनाथ के दर्शन से पूर्व महादेव के दर्शन से पहले भैरव जी के दर्शन करना जरूरी माना जाता है, इसके पीछे मान्यता है कि भैरव जी के दर्शन किए बगैर विश्वनाथ के दर्शन का लाभ नहीं प्राप्त होता। मान्यता है कि भगवान श्री हरि विष्णु ने भी काशी में ही तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया था। काशी नागरी भगवान भोलेनाथ को इतनी प्रिय है कि ऐसा माना जाता है कि शसावन के महीने में भोले बाबा और माता पार्वती काशी भ्रमण पर जरूर आते हैं। 
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काशी विश्वनाथ मंदिर - फोटो : अमर उजाला।
काशी विश्वनाथ मंदिर का पौराणिक इतिहास

काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास बहुत ही वृहद है। पौराणिक कथाओं की मानें तो भगवान शिव माता पार्वती के साथ विवाह उपरांत कैलाश रहते थे और माता पार्वती अपने पिता के घर रहतीथीं। जब माता पार्वती ने भगवान शिव से उन्हें अपने साथ ले जाने का आग्रह किया तब भगवान भोलेनाथ ने उनकी बात मानी और उन्हें लेकर काशी आए और यहां पर वह विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हुए। 

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काशी विश्वनाथ मंदिर - फोटो : Social media
काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास
इसके अतिरिक्त महाभारत और उपनिषदों में भी इस मंदिर का उल्लेख है। हालांकि इस मंदिर का निर्माण किसने कार्य इस बात का उल्लेख कहीं नहीं मिलता। लेकिन साल 1194 में मुहम्मद गौरी ने इस मंदिर को लूटने के बाद इसे तुड़वा दिया था।  इतिहासकारों के मुताबिक विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार अकबर के नौरत्नों में से एक राजा टोडरमल ने कराया था।  उन्होंने साल 1585 में अकबर के आदेश पर नारायण भट्ट की मदद से इसका जीर्णोद्धार कराया। 10वीं शताब्दी के अंत से, मंदिर और शहर को विदेशी हमलों के अंतहीन हमले का सामना करना पड़ा। इसका वर्तमान स्वरूप- दो छोटे शिखरों से घिरा एक केंद्रीय शिखर (शिखर) का निर्माण 1780 में मराठा रानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा किया गया था। उसके बाद एकमात्र बड़ा जोड़ 1839 में था, जब महाराजा रणजीत सिंह द्वारा उपहार में दिए गए सोने के साथ दो शिखर थे। 
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काशी विश्वनाथ मंदिर
क्या है वाराणसी नगरी से जुड़ी मान्यता 
वाराणसी मोक्ष प्राप्ति का स्थान माना जाता है। एक मान्यता यह भी है महादेव खुद यहां मरणासन्न व्यक्ति के कानों में तारक मंत्र का उपदेश सुनाते हैं। इसका उल्लेख मत्स्य पुराण में भी किया गया है। प्रलय आने पर भी कभी काशी का कभी लोप नहीं हुआ, ऐसा इसलिए क्योंकि कहते हैं कि पहले ही भोलेनाथ खुद काशी को अपने त्रिशूल पर उठा लेते हैं, इस तरह काशी सुरक्षित हो जाती है। 
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