इस अमावस्या को होती है शनि जयंती
ज्येष्ठ अमावस्या के दिन शनि का जन्म हुआ था। धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से शनि का महत्वपूर्ण स्थान है। आस्था के दृष्टि से देखें तो शनि को देवता की संज्ञा दी गई है और ज्योतिष में इसे एक क्रूर ग्रह माना गया है। इस दिन मंदिरों में विशेष रूप से शनि-शांति के कर्म, अनुष्ठान, पूजा-पाठ और दान आदि से पितृ दोषों की शांति होती है।
आज के दिन रखा जाता है वट सावित्री व्रत
अमावस्या के दिन किए जाने वाले अन्य पुण्य कार्यों के साथ इस दिन महिलाएं वट-सावित्री का व्रत भी करती हैं। यह हिन्दू धार्मिक संस्कृति का महत्वपूर्ण व्रत है। इस व्रत को विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु एवं सुखी जीवन के लिए रखती हैं। मान्यता है जो महिलाएं वट सावित्री व्रत का पालन सच्चे मन से करती हैं। उनके जीवनसाथी (पति) की आयु बढ़ती है।
अमावस्या पर गंगा स्नान के लिए उमड़े श्रद्धालु
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अमावस्या तिथि का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या के दिन गंगा स्नान करना चाहिए। इस दिन गंगा स्नान करने का बहुत अधिक महत्व होता है। इस बार लॅाकडाउन की वजह से गंगा स्नान करना संभव नहीं है, इसलिए घर में सभी पवित्र तीर्थों का ध्यान करते हुए स्नान करें। अगर, आपके घर में गंगा जल है तो इस दिन स्नान करने वाले जल में थोड़ा सा गंगा जल मिला लें।
अमावस्या के दिन दान करने का बहुत अधिक महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दान करने से बहुत अधिक लाभ मिलता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन दान करने से कई गुना फल मिलता है। अमावस्या के दिन अपनी क्षमता के अनुसार दान अवश्य करें।
अमावस्या के दिन अपने मन में पितरों की तृप्ति का संकल्प कर जल, अन्न का दान करना चाहिए। ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।