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Janmashtami 2023: भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन भोग क्यों लगाया जाता है, जानिए इससे जुड़ी रोचक पौराणिक कथाएं

Tue, 05 Sep 2023 01:03 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस विशेष दिन पर रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण की उपासना करने से साधक को विशेष लाभ प्राप्त होता है। 
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ठाकुरजी को अर्पित किए छप्पन भोग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Janmashtami 2023: हमारे धर्मशास्त्रों में चार रात्रियों का विशेष महत्त्व बताया गया है। दीपावली जिसे कालरात्रि कहते है , शिवरात्रि महारात्रि है, होली अहोरात्रि है तो कृष्ण जन्माष्ठमी को मोहरात्रि कहा गया है। जिनके जन्म के संयोग मात्र से बंदीगृह के सभी बंधन स्वतः ही खुल गए, सभी पहरेदार घोर निद्रा में चले गए। मां यमुना जिनके चरण स्पर्श करने को आतुर हो उठीं,ऐसे भगवान श्रीकृष्ण को मोह लेने वाला अवतार माना गया है। सनातन धर्म में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का विशेष महत्व है। पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस विशेष दिन पर रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण की उपासना करने से साधक को विशेष लाभ प्राप्त होता है। 
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प्रतिवर्ष भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला श्रीकृष्ण जन्माष्टमी इस बार बेहद खास माना जा रहा है। पुराणों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि व्यापनी अष्टमी तिथि और रोहणी नक्षत्र में हुआ था। इस वर्ष 6 सितम्बर को सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है और चंद्रमा वृषभ राशि, रोहिणी नक्षत्र, बुधवार  होने से एक विशेष योग 30 सालों बाद निर्मित हो रहा है। इसीलिए इस वर्ष श्री कृष्ण जन्माष्टमी सुख, समृद्धि और मनोवांछित फल देने वाली मानी जा रही है। इस दिन लोग शालिग्राम, लड्डू गोपाल के रूप में उनकी पूजा करते हैं और कुछ व्रत उपवास रखकर श्रीकृष्ण से विशेष प्रार्थना करते हैं। वहीं जन्माष्टमी के दिन श्रीकृष्ण जी को छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाने की परंपरा भी है। श्रीकृष्ण को छप्पन भोग ही क्यों लगते हैं? दरअसल, इसके  पीछे दो रोचक कथाएं जुड़ी है-

कथा-1
सबसे प्रचलित कथा के अनुसार, मान्यता है कि माता यशोदा अपने बाल गोपाल को रोज आठ प्रहर मतलब दिन में 8 बार भोजन कराती थीं लेकिन जब श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पूजा के कराए जाने पर देवराज इंद्र बृजवासियों से नाराज हो गए थे तो उन्होंने क्रोध में खूब वर्षा बरसाई थी ताकि बृजवासी माफी मांगने पर मजबूर हो जाए लेकिन बृज वासियों की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाया और सभी बृज वासियों को इसी पर्वत के नीचे आने को कहा। कथा है कि श्रीकृष्ण ने 7 दिनों तक बिना खाए-पिए गोवर्धन पर्वत को उठाए रखा। जब इंद्र को अपनी भूल का अहसास हुआ तो उन्होंने खुद क्षमा मांगी। सातवें दिन जब बारिश रूकी तो उनकी मां यशोदा ने बृजवासियों संग मिलकर उन्होंने 7 दिनों के 8 पहर के हिसाब से कान्हा के लिए छप्पन भोग बनाए थे। तभी से श्रीकृष्ण की पूजा में उन्हें छप्पन व्यंजनों का महाभोग लगाने की परंपरा है।
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कथा-2
एक अन्य मान्यता के अनुसार,  एक बार गोकुल की गोपियों ने श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने के लिए एक माह तक लगातार यमुना नदी में स्नान किया और माता कात्यायनी की पूजा की ताकि श्री कृष्ण ही उन्हें पति रूप में मिले। जब ये बात श्रीकृष्ण को पता चली तो श्री कृष्ण ने सभी गोपियों को उनकी इच्छापूर्ति होने का आश्वासन दिया। इसी से खुश होकर गोपियों ने श्रीकृष्ण के लिए अलग-अलग छप्पन प्रकार के व्यंजन बनाएं।


 
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