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मां सीता का प्राकट्य दिवस जानकी नवमी आज: जानिए धार्मिक महत्व, शक्तिरूप और रावण वध का रहस्य

Sat, 25 Apr 2026 10:39 AM IST
Vinod Shukla धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Janaki Navami 2026: आज जानकी नवमी है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को ही माता सीता का प्राकट्य हुआ था। 
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सीता नवमी 2026: मां सीता का जन्म पृथ्वी से हुआ, इसलिए उन्हें ‘भूमात्मजा’ कहा जाता है। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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Janaki Navami 2026: वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को जनकनंदिनी और प्रभु श्रीराम की प्राणप्रिया, सर्वमंगलदायिनी और पतिव्रताओं में शिरोमणि मां सीता का प्राकट्य हुआ। यह पावन दिन जानकी नवमी या सीता नवमी के नाम से विख्यात है। इस वर्ष यह शुभ पर्व 25 अप्रैल, शनिवार को मनाया जाएगा। धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान श्रीराम सहित मां जानकी का विधिपूर्वक व्रत-पूजन करने से पृथ्वी दान और समस्त तीर्थों के दर्शन का पुण्यफल प्राप्त होता है और व्यक्ति को दुख, रोग और संतापों से मुक्ति मिलती है।
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1. सीता नवमी का धार्मिक महत्व
सीता नवमी केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है। इस दिन मां सीता के प्राकट्य का स्मरण कर भक्त उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लेते हैं। यह पर्व स्त्री शक्ति, पवित्रता और धैर्य का संदेश देता है।

2. शाश्वत शक्ति का स्वरूप हैं मां सीता
गोस्वामी तुलसीदासजी ने मां सीता को सृष्टि की उत्पत्ति, पालन और संहार करने वाली शक्ति बताया है। वे समस्त क्लेशों का नाश करने वाली और जगत के कल्याण की अधिष्ठात्री देवी हैं। अनेक ग्रंथों में उन्हें योगमाया, जगतजननी और मोक्ष प्रदान करने वाली शक्ति के रूप में वर्णित किया गया है।
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3. त्रिविध शक्तियों का संगम
माँ सीता केवल एक आदर्श नारी ही नहीं, बल्कि क्रिया-शक्ति, इच्छा-शक्ति और ज्ञान-शक्ति का अद्भुत संगम हैं। उनके इन तीनों स्वरूपों से सृष्टि का संतुलन बना रहता है और जीवों को जीवन में दिशा मिलती है।

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4. भूमात्मजा के रूप में सीता
मां सीता का जन्म पृथ्वी से हुआ, इसलिए उन्हें ‘भूमात्मजा’ कहा जाता है। वे धरती की सहनशीलता, धैर्य और पोषण शक्ति का प्रतीक हैं। सूर्य, अग्नि और चंद्रमा का प्रकाश भी उनके ही स्वरूप का विस्तार माना गया है, जो संसार को ऊर्जा और जीवन प्रदान करता है।

5. आरोग्य और अमृत का स्रोत
धार्मिक मान्यता के अनुसार चंद्रमा की शीतल किरणों में जो औषधीय गुण होते हैं, वे माँ सीता की ही कृपा का परिणाम हैं। उनकी यह शक्ति समस्त जीवों को स्वास्थ्य, शांति और दीर्घायु प्रदान करती है। इस प्रकार वे केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि जीवनदायिनी शक्ति भी हैं।

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6. भक्ति से प्रसन्न होकर दिया वरदान
मां सीता ने अपनी कृपा से हनुमानजी को अष्ट सिद्धियां और नव निधियां प्रदान की थीं। यह प्रसंग दर्शाता है कि सच्ची सेवा और निष्काम भक्ति से प्रसन्न होकर वे भक्तों को असीम शक्ति और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

7. रावण के अंत का कारण बनीं सीता
वाल्मीकि रामायण के अनुसार रावण ने हिमालय में तपस्या कर रही वेदवती नामक कन्या का अपमान किया था। वेदवती ने क्रोधित होकर उसे श्राप दिया कि वह उसके अंत का कारण बनेगी। यही वेदवती त्रेता युग में राजा जनक के घर सीता के रूप में अवतरित हुईं और अंततः रावण के विनाश का कारण बनीं। इस प्रकार माँ सीता धर्म की स्थापना और अधर्म के नाश का माध्यम बनीं। इस प्रकार सीता नवमी का पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हमें आदर्श जीवन, धैर्य, त्याग और नारी शक्ति की महत्ता का भी संदेश देता है।
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