श्राद्ध
मान्यताओं के अनुसार जातक की मृत्यु के पश्चात भी कही ऐसे कार्य होते है जो रिश्तेदारों को, विशेषकर संतान को करने होते हैं। श्राद्ध कर्म भी उन्ही कर्मों में से एक है। श्राद्ध कर्म का हिन्दू मान्यताओं के अनुसार महत्व बहुत है। हिन्दू परम्पराओं के अनुसार पूर्वजों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का ये सबसे बड़ा पर्व है।
हर वर्ष भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास की अमावस्या तक पूरे पखवाड़े में श्राद्ध कर्म करने का विधान है। इस वर्ष पितृ पक्ष का समय 13 सितम्बर से 28 सितम्बर का है।
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