मकर संक्रांति के बस कुछ ही दिन बचे हैं। दुकानों पर तिल और गुड़ सज रहे हैं और लोग सूर्य एवं शनि देव को प्रसन्न करने के लिए तिल और गुड खरीदने में लगे हैं। मकर संक्राति पर तिल का इस कदर महत्व इसलिए है क्योंकि पुराणों में बताया गया है कि इस दिन सूर्य और शनि की पूजा तिल से करने पर शनि के अशुभ प्रभाव में कमी आती है सूर्य देव प्रसन्न होकर अन्न धन में वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
मकर संक्राति के अवसर पर तिल से सूर्य देव की पूजा के संदर्भ में श्रीमद्भागवत एवं देवी पुराण में एक कथा का उल्लेख किया गया है। पुत्र शनि एवं अपनी दूसरी पत्नी छाया के शाप के कारण सूर्य भगवान को कुष्ट रोग हो गया। किन्तु पुत्र यमराज के प्रयत्न से उनका कुष्ट रोग समाप्त हो गया। लेकिन सूर्य देव ने क्रोधित होकर शनि के घर कुंभ (राशि) को जलकर राख कर दिया। इससे शनि और उनकी माता को कष्ट का सामना करना पड़ रहा था।
यमदेव ने अपनी सौतली माता और भाई शनि के कल्याण के लिए पिता सूर्य को काफी समझाया तब जाकर सूर्य देव शनि के घर कुंभ में पहुंचे। वहां सब कुछ जला हुआ था। शनि देव के पास तिल के अलावा कुछ नहीं था इसलिए उन्होंने काले तिल से सूर्य की पूजा की। इससे प्रसन्न होकर सूर्य ने आशीर्वाद दिया कि शनि का दूसरा घर मकर राशि मेरे आने पर धन धान्य से भर जाएगा। तिल के कारण ही शनि को उनका वैभव फिर से प्राप्त हुआ था इसलिए शनि देव को तिल प्रिय है। इसी समय से मकर संक्राति पर तिल से सूर्य एवं शनि की पूजा का नियम आरंभ हुआ।
शनि देव की पूजा से प्रसन्न होकर सूर्य देव ने शनि महाराज को आशीर्वाद दिया कि जो भी व्यक्ति मकर संक्राति के दिन काले तिल से सूर्य की पूजा करेगा उसके सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाएंगे। इस दिन तिल से सूर्य पूजा करने पर आरोग्य सुख में वृद्धि होती। शनि के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं तथा आर्थिक उन्नति होती है।