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नवरात्र विशेषः चैत्र नवरात्र का आपके जीवन में महत्व

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चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा 31 मार्च, 2014 से नवरात्र का शुभारंभ हो रहा है। यह तिथि नवसंवत्सर के आरंभ की तिथि भी है, इस संवत्सर का नाम होगा प्लवंग जिसके स्वामी हैं ब्रह्माजी।
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नवरात्र के इस नौ दिनों तक शक्ति की आराध्या मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना होगी। नवरात्र के अंतिम यानी नौवें दिन मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम की आराधना की जाती है।

स्वास्थ्य की दृष्टि से चैत्र नवरात्र का महत्व

चैत्र नवरात्र धार्मिक आस्था एवं विश्वास से जुड़ा पर्व तो है ही, साथ ही इस पर्व का हमारे स्वास्थ्य और पवित्रता से भी विशेष संबंध है। इस पर्व को मनाने वाले भक्तगण अपनी शारीरिक और मानसिक शक्ति के अनुरूप नवरात्र में व्रत उपवास करते हुए पूर्ण श्रद्धा, विश्वास और पवित्र भावना के साथ मन की चंचलता को नियंत्रित करते हैं तथा संयमित जीवन व्यतीत करते हैं।

इस समय मां भगवती के समक्ष अग्नि प्रज्‍ज्वलित करके शुद्ध घी, समिधा, कपूर, लौंग, गुगल आदि वस्तुओं को इसमें समर्पित करते हैं, जिससे हमारे आसपास का वातावरण शुद्ध हो जाता है।

जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हमारे स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायक सिद्ध होता है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को सात नीम की कोपलें, सात तुलसीदल और सात नग कालीमिर्च का सेवन करना अच्छा माना गया है।
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नवरात्र में इन मंत्रों से पाएं सुख समृद्घि

नवरात्र में देवी मां की पूजा के दौरान पूर्ण श्रद्धा और विधि-विधान से जिन मंत्रों का पाठ किया जाता है, वे भी हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के पोषक होते हैं। इन मंत्रों के प्रभाव से मन के समस्त विकार दूर होने लगते हैं, जिससे हमारे शरीर में आश्चर्यजनक सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं।

देवी के कवच का पाठ करने से मनुष्य समस्त ऐश्वर्य, विजय, धन-संपदा और चेचक, कुष्ठ एवं विषजनित रोगों के प्रभाव से मुक्त हो जाता है। दुर्गा सप्तशती में कीलकम के पाठ से आरोग्य सुख मिलता है।

वहीं दुर्गा सप्तशती का संपूर्ण पाठ करने से रोग, ग्रह-बाधाएं, बुरे स्वप्न से होने वाली पीड़ाएं, धनाभाव, कष्ट, शत्रु बाधा आदि नष्ट हो जाते हैं और बुद्धि का कल्याण होने के साथ ही अंतःकरण की शुद्धि होती है।

आरोग्य और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए दुर्गा मंत्रः
`देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम।
रूपं देहि, जयं देहि, यशो देहि द्विषो जहि।।"

महामारी के नाश के लिएः
"जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते।।"
 
इसी प्रकार श्री रामचरितमानस में भी बहुत-सी ऐसी चौपाइयां हैं, जिनके नियमित पाठ से समस्त मनोरथ पूर्ण होते हैं। जैसे
रोग और उपद्रवों की शांति के लिएः
`दैहिक दैविक भौतिक तापा।
राम राज नहिं काहुहि व्यापा।।’

संकटों के निवारण के लिए
"दीन दयाल बिरिदु संभारी।
 हरहु नाथ मम संकट भारी।।"
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