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होली 2019 : तीन देवताओं से है होली का गहरा नाता, जानिए कैसे

Tue, 19 Mar 2019 01:53 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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होली 2019
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होली 20 और 21 मार्च को मनाई जाएगी। शास्त्रानुसार, प्रह्लाद के पिता हिरणयकश्यप ने प्रह्लाद को होलिका की गोद में बिठाकर जलाने की कोशिश की, परंतु प्रह्लाद के बच जाने और होलिका के जल जाने की घटना चरितार्थ हुई। प्रह्लाद तपे कुंदन की तरह से निखरकर आए और भक्त के रूप में स्थापित हुए। इसके बाद पिता ने पुत्र को मारने का स्वयं प्रयास किया। तब खंभे से नृसिंह भगवान ने प्रकट होकर हिरण्यकश्यप का अंत कर दिया।  

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 होली का भगवान शंकर से नाता
पौराणिक नजरिए से होली का पर्व भगवान शंकर, कृष्ण और विष्णु से जुड़ा है। होली शिवरात्रि के ठीक 15 दिन बाद मनाई जाती है। शिवजी हमेशा साधना में लीन रहते वाले वैरागी थे। कामदेव ने कैलाश पर्वत में जाकर भगवान शिव की साधना को भंग करने और उनके अंदर काम वासना को जागृति करने के उद्देश्य कोशिशे की। तब भगवान शिव ने अपनी तीसरी नेत्र से कामदेव को भस्म कर दिया था। ऐसी मान्यता है होली के एक दिन पहले होलिका जो जलती है इसी प्रसंग के बाद हुई थी।

शिवजी की तपस्या भंग होने के बाद देवताओं ने शिवजी को पार्वती से विवाह के लिए राज़ी कर लिया। कामदेव की पत्नी रति को अपने पति के पुनर्जीवन का वरदान और शिवजी का पार्वती से विवाह का प्रस्ताव स्वीकार करने की खुशी में देवताओं ने इस दिन को उत्सव की तरह मनाया यह दिन फाल्गुन पूर्णिमा का ही दिन था।    
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होली का भगवान श्रीकृष्ण और राधा का संबंध
कामदेव को भस्म करने के बाद शिवजी शांत हुए थे तब देवी पार्वती और कामदेव की पत्नी रति ने कामदेव को दोबारा नया जीवन देने का आग्रह किया था। शिवजी ने उनकी प्रार्थना को मानकर कामदेव और रति को राधा और श्रीकृष्ण के रूप में पुनर्जन्म दिया था। तभी से भगवान कृष्ण और राधा मिलकर होली खेलते है।

भगवान विष्णु से होली का नाता 
भगवान विष्णु सदैव अपने भक्तों पर कृपा रखते है और संकट के समय हमेशा उनकी रक्षा करते हैं। भक्त प्रह्लाद राक्षस कुल में जन्मे थे परन्तु वे भगवान नारायण के अनन्य भक्त थे।उनके पिता हिरण्यकश्यप को उनकी ईश्वर भक्ति अच्छी नहीं लगती थी इसलिए  हिरण्यकश्यप  ने प्रह्लाद को अनेकों प्रकार के जघन्य कष्ट दिए। उनकी बुआ होलिका जिसको ऐसा वस्त्र वरदान में मिला हुआ था जिसको पहन कर आग में बैठने से उसे आग नहीं जला सकती थी। होलिका भक्त प्रह्लाद को मारने के लिए वह वस्त्र पहनकर उन्हें गोद में लेकर आग में बैठ गई। भक्त प्रह्लाद की विष्णु भक्ति के फलस्वरूप होलिका जल गई और प्रह्लाद का बाल भी बांका नहीं हुआ।

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