भक्त प्रहलाद की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, राजा हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रहलाद भगवान श्रीहरि के बहुत बड़े भक्त थे। हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को भगवान विष्णु की भक्ति से दूर करने के लिए आठ दिनों तक कठिन यातनाएं दी और उन्हें मारने का प्रयास किया। हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था। आठवें दिन वह भक्त प्रहलाद को अपनी गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई, परंतु होलिका अग्नि में भस्म हो गई और भगवान विष्णु की कृपा से भक्त प्रहलाद को कुछ भी नहीं हुआ।
कामदेव की कथा
एक कथा को अनुसार देवताओं के कहने पर कामदेव ने शिव की तपस्या भंग करने के लिए कई दिनों में कई तरह के प्रयास किए थे। जब भगवान शिव की तपस्या भंग हुआ तो क्रोध में उन्होंने कामदेव को भस्म कर दिया। कथा के अनुसार यह फाल्गुन शुक्ल अष्टमी का दिन था। इसके बाद कामदेव की पत्नी रति ने उनके अपराध के लिए शिवजी से क्षमा याचना कर कामदेव को पुनर्जीवन देने की प्रार्थनी की। तब भगवान शिव ने कामदेव को पुनर्जीवन देने का आश्वासन दिया।