कामरूप कामाख्या मंदिर, असम
कामरूप कामाख्या मंदिर असम के गुवाहाटी में स्थित है। कामाख्या माता के माहवारी के दिनों में यहां उत्सव मनाया जाता है, इस दौरान मंदिर में पुरुषों का आना बिल्कुल वर्जित होता है। कामाख्या माता के माहवारी के दौरान यहां पुजारी भी महिला होती है। माना जाता है कि कामाख्या माता के मंदिर में यहां आने वाले सभी भक्तों की समस्त मनोकामना पूर्ण करती हैं। इस मंदिर की एक खासियत यह भी है कि यहां पशुओं की बलि दी जाती है और भंडारा भी चलता है।
ब्रह्मदेव मंदिर, पुष्कर, राजस्थान
ब्रह्मा देव मंदिर राजस्थान के पुष्कर में स्थित है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, ब्रह्मा मंदिर की उत्पत्ति के साथ एक दिलचस्प किंवदंती जुड़ी हुई है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान ब्रह्मा ने खुद पुष्कर को अपने मंदिर के लिए चुना था। किंवदंती है कि भगवान ब्रह्मा ने स्वर्ग से एक कमल का फूल गिराया और जहाँ फूल गिरा, वहाँ पुष्कर का उदय हुआ। प्राचीन शास्त्रों में ब्रह्मा को समर्पित एकमात्र मंदिर के रूप में वर्णित, पुष्कर को "हिंदू धर्म के पवित्र स्थलों में सर्वोच्च" का खिताब प्राप्त है। सबसे खास बात ये है कि ब्रह्मा देव मंदिर के गर्भ गृह में विवाहित पुरुषों का प्रवेश की अनुमति नहीं होती है।
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भगवती देवी मंदिर, कन्याकुमारी
भारत के दक्षिणी छोर पर स्थित कन्याकुमारी, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए जाना जाता है। यहां स्थित भगवती देवी मंदिर, जिसे कुमारी अम्मन मंदिर भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। यह मंदिर देवी पार्वती को समर्पित है, जिन्हें यहां कुमारी देवी के रूप में पूजा जाता है। इस मंदिर में सिर्फ संन्यासी पुरुष ही मां के दर्शन कर सकते हैं। इस मंदिर में शादीशुदा पुरुषों को अंदर जाने की अनुमति नहीं है।
अट्टुकल मंदिर, केरल
अट्टुकल भगवती मंदिर भारत के केरल राज्य के तिरुवनंतपुरम शहर में स्थित एक प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है। यह मंदिर भद्रकाली देवी को समर्पित है। यह मंदिर अपने विशाल वार्षिक उत्सव, अट्टुकल पोंगाला के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें लाखों महिलाएं भाग लेती हैं, जिससे यह दुनिया का सबसे बड़ा महिला समागम बन जाता है। इस दौरान यहां पुरुषों के प्रवेश पर मनाही होती है।
माता मंदिर, मुजफ्फरपुर बिहार
बिहार के मुजफ्फरपुर में के इस मंदिर में पुरुषों का जाना एक सीमित समय के लिए वर्जित होता है। यहां पर मंदिर के मान्यताओं की बहुत कड़ाई से पालन की जाती है। इस मंदिर के नियम इतने कड़े हैं कि यहां पुरुष पुजारी भी इस दौरान नहीं आ सकता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।