फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hanuman Ji Worship : सफल हनुमान जी की साधना के 10 नियम, इस उपाय से प्रसन्न होंगे हनुमान जी

Thu, 10 Nov 2022 07:54 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हनुमान जी का जो भी नाम स्मरण करता है वो भय से सदैव मुक्त हो जाता है। हनुमान साधना के लिए कुछ नियम शास्त्रों में बताए गए हैं। 
 
विज्ञापन
हनुमान जी को हमेशा तिल के तेल में ही मिले हुए सिंदूर का लेपन किया जाता है। - फोटो : iStock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

वर्तमान युग में हनुमान जी की साधना को तुरंत फल देने वाली साधना कहा गया है। इसी कारण से हनुमान जी जन-जन के देवता कहलाते हैं। इनकी पूजा अर्चना बेहद सरल है और इनके मंदिर भी हर जगह बने हुए है। मानव जीवन का सबसे बड़ा दुःख भय है और हनुमान जी का जो भी नाम स्मरण करता है वो भय से सदैव मुक्त हो जाता है। हनुमान साधना के लिए कुछ नियम शास्त्रों में बताए गए हैं। 
विज्ञापन


1 - हनुमान की जी सेवा में शुद्धता बेहद जरूरी है। प्रसाद शुद्ध घी का बना हुआ होना चाहिए। 

2 - हनुमान जी को हमेशा तिल के तेल में ही मिले हुए सिंदूर का लेपन किया जाता है। कई जगह शुद्ध घी लेने का भी विधान है। 

3 - हनुमान जी को केसर के साथ घिसा हुआ लाल चंदन भी लगाना चाहिए। 

4 - पुष्पों में लाल और पीले बड़े फूल अर्पित करें। कमल का फूल और सूर्यमुखी का फूल अर्पित करने पर हनुमान जी प्रसन्न होते हैं। 

5 - सुबह के पूजन में गुड़,नारियल का गोला और लड्डू अर्पित करे। दोपहर में गुड़,घी,चूरमा और रोट अर्पित करें। शाम की पूजा में आम,अमरुद और केला आदि फलों का प्रसाद चढ़ाएं। 

6 - हनुमान जी की साधना में ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य है। 

7 - जो भी प्रसाद हनुमान जी को अर्पित किया जाए उसे साधक को अवश्य ग्रहण करना चाहिए। 

8 - मंत्र जप सदैव बोलकर करें,हनुमान जी के समक्ष उनके नेत्रों की और देखते हुए मंत्रों का जाप करें। 

9 - साधना में 2 प्रकार की माला ली जाती है। सात्विक साधना के लिए रुद्राक्ष की माला और तामसी साधना के लिए मूंगे की माला का प्रयोग करें। 
विज्ञापन


10 - मंगलवार को हनुमान की विशेष साधना का नियम है। अनुष्ठान इसी दिन करें। बाकी शनिवार को भी हनुमत पूजा का विधान है। 

हनुमत साधना से ग्रह अनुकूल होते हैं। सूर्य और हनुमान जी एक दूसरे के स्वरूप है इसलिए हनुमत साधना करने वाले जातक में सूर्य तत्व आता है। उसके अंदर सूर्य जैसा तेज,आत्मविश्वास और ओज आ जाता है। यही तेज उस व्यक्ति को सामान्य व्यक्ति से अलग करते हैं।  भगवान हनुमान जी कृपा पाने और उनको प्रसन्न करने के लिए रोजना हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करना चाहिए।
विज्ञापन


Hanuman Chalisa : चमत्कारी है हनुमान चालीसा का पाठ करना, मिलता है भय से मुक्ति और पूरी होती है मनोकामनाएं,पढ़िए संपूर्ण हनुमान चालीसा

हनुमान चालीसा Hanuman Chalisa

दोहा

श्रीगुरु चरन सरोज रज निजमनु मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।
रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

महावीर विक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।
कंचन वरन विराज सुवेसा।
कानन कुण्डल कुंचित केसा।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
काँधे मूँज जनेऊ साजै।
शंकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग वन्दन।।

विद्यावान गुणी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
विकट रूप धरि लंक जरावा।।
भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे।।

लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीशा।
नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कवि कोविद कहि सके कहाँ ते।।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मंत्र विभीषन माना।
लंकेश्वर भये सब जग जाना।।
जुग सहस्र योजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।
दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डरना।।

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।।
भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।
संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम वचन ध्यान जो लावै।।

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिनके काज सकल तुम साजा।
और मनोरथ जो कोई लावै।
सोई अमित जीवन फल पावै।।

चारों युग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।
साधु-संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस वर दीन जानकी माता।।
राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुम्हरे भजन राम को भावै।
जनम-जनम के दुख बिसरावै।।
अन्त काल रघुबर पुर जाई।
जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेई सर्व सुख करई।।
संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।
जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहिं बंदि महा सुख होई।।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा।।

दोहा 
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें