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Hanuman Janmotsav 2026: हनुमान जन्मोत्सव आज, जानें शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और हनुमान चालीसा पाठ का महत्व

Thu, 02 Apr 2026 06:39 AM IST
Vinod Shukla धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Hanuman Jayanti 2026: हर वर्ष चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि पर हनुमान जी का जन्मोत्सव बड़े ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। इस दिन हनुमान जी पूजा-अर्चना, आरती और हनुमान चालीसा का पाठ करने का विशेष महत्व होता है। 
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हनुमान जन्मोत्सव 2026 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Hanuman Jayanti 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि को भगवान राम के परम भक्त हनुमानजी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस तिथि पर भगवान शिव के रुद्रावतार हनुमान जी का जन्म माता अंजना और वानरराज केसरी के घर हुआ था। इसके अलावा कई जगहों पर एक दूसरी मान्यता है कि हनुमान जी का जन्म कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को हुआ था। चैत्र पूर्णिमा की तिथि पर हर वर्ष भगवान हनुमान की विधि-विधान के साथ व्रत रखते हुए पूजन-अर्चना होती है। हनुमान जन्मोत्सव पर भगवान हनुमान की पूजा करने से सुख-समृद्धि , धन-वैभव की प्राप्ति और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। हनुमानजी की आराधना करने से व्यक्ति के रोग,दोष और भय से मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं हनुमान जन्मोत्सव पर पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र समेत कई जानकारी। 

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हनुमान जयंती शुभ तिथि 2026
हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 01 अप्रैल को सुबह 07 बजकर 6 मिनट से होकर 2 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 41 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर हनुमान जन्मोत्सव का पर्व 2 अप्रैल, गुरुवार के दिन मनाया जाएगा। 
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हनुमान जन्मोत्सव 2026 शुभ मुहूर्त 
हनुमान जन्मोत्सव पर भगवान हनुमान की कृपा पाने के लिए विधि-विधान के साथ शुभ मुहूर्त में पूजा करने का विशेष महत्व होता है। 

पहला मुहूर्त- सुबह 06 बजकर 10 मिनट से लेकर सुबह 07 बजकर 44 मिनट तक।
दूसरा मुहूर्त- शाम 06 बजकर 39 मिनट से लेकर रात 08 बजकर 6 मिनट तक।
ब्रह्रा मुहूर्त- सुबह 4 बजकर 38 मिनट से लेकर सुबह 5 बजकर 24 मिनट तक।
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजे से लेकर दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक।

हनुमान जन्मोत्सव 2026 पूजन विधि
- हनुमान जन्मोत्सव के एक दिन पहले रात्रि को सोने से पहले भगवान राम और माता के साथ हनुमान जी का स्मरण करें। 
- हनुमान जन्मोत्सव के दिन दिन सुबह जल्दी उठें और दोबारा से भगवान राम-माता सीता और हनुमानजी का स्मरण करें।
- फिर सुबह स्नान करके हाथ में गंगाजल लेकर व्रत का संकल्प करें। 
- फिर पूजा स्थल पर हनुमान जी की प्रतिमा को स्थापित करें और षोडशोपाचार विधि से पूजा अर्चना करें। 
- इसके बाद हनुमान जी की प्रतिमा को फूल, माला, केसर, चंदन, माला चोला, जनेऊ और लंगोट अर्पित करें। 
- इसके अलावा चमेली के तेल में सिंदूर मिलकर भगवान हनुमान को अर्पित करें। फिर भोग अर्पित करें। 
- अंत में हनुमान चालीसा का पाठ, सुंदरकांड, बजरंग बाण का पाठ करने से हनुमान जी आरती करें। 


श्रीहनुमान जी की आरती : Hanuman Ji Ki Aarti 

आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

जाके बल से गिरिवर कांपे।
रोग दोष जाके निकट न झांके।।

अंजनि पुत्र महाबलदायी।
संतान के प्रभु सदा सहाई।।

दे बीरा रघुनाथ पठाए।
लंका जारी सिया सुध लाए।।

लंका सो कोट समुद्र सी खाई।
जात पवनसुत बार न लाई।।

लंका जारी असुर संहारे।
सियारामजी के काज संवारे।।

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।
आणि संजीवन प्राण उबारे।।

पैठी पताल तोरि जमकारे।
अहिरावण की भुजा उखाड़े।।

बाएं भुजा असुर दल मारे।
दाहिने भुजा संतजन तारे।।

सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे।
जै जै जै हनुमान उचारे।।

कंचन थार कपूर लौ छाई।
आरती करत अंजना माई।।

लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई।
तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।।

जो हनुमानजी की आरती गावै।
बसी बैकुंठ परमपद पावै।।


Hanuman Chalisa  श्री हनुमान चालीसा

दोहा
श्रीगुरु चरन सरोज रज , निजमन मुकुरु सुधारि। बरनउं रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।



चौपाई
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।। राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।। कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुँचित केसा।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे। कांधे मूंज जनेउ साजे।। शंकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग वंदन।।

बिद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।। प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा।। भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचन्द्र के काज संवारे।।

लाय सजीवन लखन जियाये। श्री रघुबीर हरषि उर लाये।। रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं।। सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कबि कोबिद कहि सके कहां ते।। तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना।। जुग सहस्र जोजन पर भानु। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।। दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।। सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रच्छक काहू को डर ना।।

आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै।। भूतपिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।।

नासै रोग हरे सब पीरा। जपत निरन्तर हनुमत बीरा।। संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।

सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा।। और मनोरथ जो कोई लावै। सोई अमित जीवन फल पावै।।

चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।। साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकन्दन राम दुलारे।।

अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।। राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुह्मरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै।। अंत काल रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरिभक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।। संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।। जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बन्दि महा सुख होई।।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।। तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महं डेरा।।

दोहा
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

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