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Hanuman Janmotsav: कलियुग में भी हो सकते हैं हनुमान जी के दर्शन, इन स्थानों पर विराजमान हैं बजरंगबली

Fri, 11 Apr 2025 01:53 PM IST
दीक्षा पाठक धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Hanuman Jayanti 2023: कलियुग में हनुमान जी अमर हैं। वह न केवल भक्तों की श्रद्धा में, बल्कि कुछ विशेष स्थानों पर साक्षात रूप में विद्यमान भी हैं। तो आज की इस खबर में हम आपको उन पांच दिव्य स्थानों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे पवित्र दर्जा प्राप्त है, जहां हनुमानजी की उपस्थिति मानी जाती है।
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हनुमान जन्मोत्सव 2025 - फोटो : freepik.com
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विस्तार
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वेदों में धर्म शास्त्रों में हनुमान जी को कलियुग का देवता कहा जाता है। कहते हैं कि चारों युगों में उनका प्रताप विद्यमान है। कहते हैं कि जो भक्त सच्चे मन से हनुमान जी की उपासना करता है, वह उसे दर्शन जरूर देते हैं। कहते हैं कि राम काज करने को आतुर वीर हनुमान आज भी इस धरती पर विचरण कर रहे हैं। कलियुग में वे अमर हैं। वह न केवल भक्तों की श्रद्धा में, बल्कि कुछ विशेष स्थानों पर साक्षात रूप में विद्यमान भी हैं। तो आज की इस खबर में हम आपको उन पांच दिव्य स्थानों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे पवित्र दर्जा प्राप्त है, जहां हनुमानजी की उपस्थिति मानी जाती है। आइए जानते हैं।
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 1. गंधमादन पर्वत
हिमालय की पवित्र वादियों में बसा यह पर्वत कोई साधारण स्थान नहीं। कहते हैं कि यहां हनुमानजी आज भी यहीं गहन तपस्या में लीन हैं। ये वही गंधमादन है, जहां ऋषि-मुनि आज भी दिव्य ऊर्जा का अनुभव करते हैं। यहां हनुमान के दर्शन दुर्लभ है पर जो भी साधक सच्चे मन से यहां तप करता है, उसे उनकी उपस्थिति का आभास जरूर होता है।

 2. जगन्नाथ पुरी
उड़ीसा की पवित्र भूमि, जहां श्री जगन्नाथ जी विराजते हैं, वहां हनुमानजी की सेवा भावना भी अमर है। मान्यता है कि ‘बड़ा डांडा’ मार्ग पर भगवान हनुमान सदा अदृश्य रूप में उपस्थित रहते हैं, ताकि उनके आराध्य श्रीराम अर्थात जगन्नाथ की यात्रा बिना किसी बाधा के पूरी हो सके।
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 3. चित्रकूट
यही वह स्थान है, जहां श्री राम और हनुमान का प्रथम मिलन हुआ था। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर बसा चित्रकूट आज भी उस पवित्र भेंट की गवाही देता है। चित्रकूट के पर्वतों, घाटों और जंगलों के बीच आज भी कई संतों और भक्तों ने हनुमानजी के दर्शन के बारे में अपना अनुभव बताया है।

 4. रामेश्वरम
तमिलनाडु के सुदूर दक्षिण में स्थित रामेश्वरम वह पुण्य भूमि है, जहां से हनुमानजी ने समुद्र लांघा और लंका की ओर प्रस्थान किया था। यह स्थान भक्ति और सेवा का मेल है। भक्त मानते हैं कि यहां हनुमानजी की ऊर्जा आज भी महसूस होती है।

 5. महेंद्रगिरि पर्वत
गजपति जिले की ऊंचाइयों में स्थित यह पर्वत, आज भी रहस्यमय शांति से घिरा है। पुराणों में इसका उल्लेख हनुमान जी की तपोस्थली के रूप में हुआ है। यहां के स्थानीय लोग आज भी यह मानते हैं कि हनुमान जी पर्वत की गुफाओं में निवास करते हैं और कलियुग में धर्म की रक्षा हेतु सदा जागरूक हैं। ऐसे में लोग यहां हनुमान जी की उपस्थिति को भी महसूस करते हैं।


 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 


 
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