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Hanuman Janmotsav 2025: बजरंगबली को कैसे मिलीं अलौकिक शक्तियां? जामवंत को दिलाना पड़ा था याद

Fri, 11 Apr 2025 11:56 AM IST
दीक्षा पाठक धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Hanuman Ji Power: क्या आपने कभी सोचा है कि हनुमान जी को यह अलौकिक शक्तियां कहां से प्राप्त हुई थी? आज की इस खबर में हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं।
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हनुमान जन्मोत्सव 2025 - फोटो : adobe stock
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विस्तार
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12 अप्रैल को हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाएगा। हनुमान जी की कहानी जितनी रहस्यमयी है, उतनी ही प्रेरणादायक भी है। उनकी अलौकिक शक्तियां किसी मंत्र से नहीं, बल्कि एक दिव्य योजना का परिणाम थीं। उनका जन्म स्वयं एक चमत्कार था। अंजनी और केसरी की गोद में जन्मे इस बालक में वायु देव ने प्राण फूंके थे। इसलिए वे पवनपुत्र कहलाए। उनके जन्म के साथ ही विशेष तेज, बल और गति का संचार हुआ, जैसे सृष्टि ने स्वयं उन्हें किसी महान कार्य के लिए तैयार किया हो। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि हनुमान जी को यह अलौकिक शक्तियां कहां से प्राप्त हुई थी? आज की इस खबर में हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं।
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यह है बचपन की कहानी
बजरंगबली के बचपन की एक घटना ने समस्त देवताओं का ध्यान उनकी ओर खींच लिया। एक दिन, जब बालक हनुमान ने आकाश में चमकते हुए सूर्य को देखा तो उन्हें वह एक बड़ा लाल फल समझ लिया। भूख से व्याकुल होकर वे बिना संकोच आकाश की ओर उड़ चले और सूर्य को निगलने की कोशिश करने लगे। इस घटना से ब्रह्मांड में अंधकार छा गया। घबराकर इंद्र देव ने अपने वज्र से उन पर प्रहार किया, जो उनकी ठोड़ी पर लगा और वे मूर्छित होकर धरती पर गिर पड़े। यह दृश्य देख पवन देव इतने क्रोधित हुए कि उन्होंने पूरे संसार से वायु हटा ली। जीव-जन्तु, देव और मानव, सब सांसों के लिए तड़पने लगे।

देवताओं ने दिया वरदान
देवताओं को समझ आ गया कि यह कोई साधारण बालक नहीं है। पवन देव को प्रसन्न करने के लिए सभी प्रमुख देवता प्रकट हुए और हनुमान जी को ऐसे वरदान दिए, जो उन्हें एक दिव्य योद्धा में बदलने वाले थे। ब्रह्मा ने उन्हें किसी भी शस्त्र से अजेय बना दिया, भगवान शिव ने अतुल बुद्धि और पराक्रम दिया, विष्णु जी ने धर्म में अटूट विजय का आशीर्वाद दिया, अग्नि ने उन्हें अग्नि से अघात्य किया, वरुण ने जल से मुक्तता दी, यमराज ने मृत्यु के भय से उन्हें ऊपर उठा दिया और इंद्र ने, जो वज्र उन्होंने फेंका था, उसी को शक्ति का प्रतीक बनाकर हनुमान की ठोड़ी को बलशाली बनाया। इसी वजह से उन्हें "हनुमान" कहा जाता है।
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ऋषियों ने दिया था यह वरदान
हनुमान जी को यह चमत्कारी शक्तियां उन्हें तुरंत स्मरण नहीं रहीं। ऋषियों ने उन्हें एक विशेष वरदान के रूप में यह भी दिया कि वे अपनी शक्तियां तभी याद करेंगे जब कोई उन्हें इसके योग्य ठहराएगा। यह वरदान उनके अहंकार को पूरी तरह समाप्त करता था। वर्षों बाद जब रामायण के काल में हनुमान जी के लंका जाने की योजना बनी और कोई मार्ग नहीं सूझा, तब जामवंत ने उन्हें उनकी असली शक्ति की याद दिलाई। जैसे ही उन्हें अपनी दिव्यता का आभास हुआ, वे आकाश की ओर उड़े और समुद्र को लांघते हुए लंका पहुंच गए। वहां उन्होंने न केवल सीता माता का पता लगाया, बल्कि रावण की सेना में भी हाहाकार मचा दिया।

हनुमान जी के पास हैं आध्यात्मिक शक्तियां
हनुमान जी की शक्तियाँ केवल भौतिक नहीं थीं, वे आध्यात्मिक भी थीं। उनकी सबसे बड़ी शक्ति थी, उनकी भक्ति। श्रीराम के लिए उनकी निस्वार्थ भक्ति ही थी, जहां से वे सब कुछ प्राप्त करते थे। उनका जीवन हमें सिखाता है कि शक्ति केवल बल में नहीं होती, वह सेवा, श्रद्धा और समर्पण में होती है।


 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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