8 अप्रैल, बुधवार यानी आज भगवान राम के भक्त संकटमोचन हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि के दिन हनुमान जी का जन्म हुआ था। हनुमान जन्मोत्सव के दिन हनुमान जी की पूजा-अर्चना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। आइए, आज हम आपको बताते हैं हनुमान जी की किस आरती को करने से मनवांछित फलों की प्राप्ति होती है।
ॐ जय हनुमत वीरा स्वामी जय हनुमत वीरा
संकट मोचन स्वामी तुम हो रणधीरा।। ॐ
पवन - पुत्र अंजनी - सुत महिमा अति भारी।
दुःख दरिद्र मिटाओ संकट सब हारी।। ॐ
बाल समय में तुमने रवि को भक्ष लियो।
देवन स्तुति किन्ही तबही छोड़ दियो।। ॐ
कपि सुग्रीव राम संग मैत्री करवाई।
बाली बली मराय कपीशाहि गद्दी दिलवाई।। ॐ
जारि लंक को ले सिय की सुधि वानर हर्षाये।
कारज कठिन सुधारे रधुवर मन भाये।। ॐ
शक्ति लगी लक्ष्मण के भारी सोच भयो।
लाय संजीवन बूटी दुःख सब दूर कियो।। ॐ
ले पाताल अहिरावण जबहि पैठि गयो।
ताहि मारि प्रभु लाये जय जयकार भयो।। ॐ
घाटे मेंहदीपुर में शोभित दर्शन अति भारी।
मंगल और शनिश्चर मेला है जारी।। ॐ
श्री बालाजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत इन्द्र हर्षित मन वांछित फल पावे।।ॐ
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।।
अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।
दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुध लाए।
लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।
लंका जारी असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आणि संजीवन प्राण उबारे।
पैठी पताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखाड़े।
बाएं भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे।
सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे। जै जै जै हनुमान उचारे।
कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।
लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।
जो हनुमानजी की आरती गावै। बसी बैकुंठ परमपद पावै।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।> >