हिंदू धर्म में भगवान हनुमान सबसे ज्यादा पूजे जाने वाले देवता हैं। मंगलवार और शनिवार का दिन हनुमानजी की कृपा पाने के लिए सबसे अच्छा दिन होता है। मान्यता है कि रामभक्त हनुमान कलयुग में भी इस पृथ्वी पर वास करने वाले देवता हैं। किसी भी तरह की परेशानी या विपत्ति के समय अगर हनुमानजी का सिर्फ नाम जप कर लिया जाय जीवन में आयी परेशानी फौरन ही दूर हो जाती है। हनुमानजी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए और सभी तरह के संकटों से मुक्ति के लिए हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करना बहुत ही लाभकारी माना गया है। हनुमान चालीसा की हर एक चौपाई बहुत ही उपयोगी मानी गई है। हनुमान चालीसा में एक पंक्ति आती है ‘अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, असवर दीन जानकी माता’। शास्त्रों के अनुसार माता सीता ने वीर हनुमानजी को आठ सिद्धियां और नौ निधियां का वरदान दिया था। आइए जानते है इस चौपाई में नौ निधियों का अर्थ
1 . पद्म निधि- इसके लक्षणों से संपन्न मनुष्य सात्विक गुणयुक्त वाला होता है एवं उसकी कमाई गई संपदा भी सात्विक होती है। सात्विक तरीके से कमाई गई संपदा पीढ़ियों तक चलती रहती है। सात्विक गुणों से संपन्न व्यक्ति सोना, चांदी आदि का संग्रह करके दान करता है।
2 .महापद्म निधि- यह निधि भी पद्म निधि की तरह ही सात्विक होती है। लेकिन इसका प्रभाव पीढ़ी दर पीढ़ी नहीं रहता। इस निधि से लक्षित व्यक्ति अपने संग्रहित धन आदि का दान धार्मिक स्थानों में करता है।
3 .नील निधि- इस निधि में सत्व और रज गुण दोनों ही मिश्रित होते हैं। ऐसी निधि व्यापार द्वारा ही प्राप्त होती है। इसलिए इस निधि से संपन्न प्राणी में दोनों ही गुणों की प्रधानता होती है। नील निधि से सुशोभित मनुष्य सात्विक तेज से संयुक्त होता है। उसकी संपत्ति तीन पीढ़ी तक रहती है।
4 .मुकुंद निधि- इस निधि में पूर्णत: रजोगुण की प्रधानता रहती है। इसलिए इसे राजसी स्वाभाव वाली निधि कहा गया है।इस निधि से संपन्न व्यक्ति या साधक का मन भोगादि में लगा रहता है यह निधि एक पीढ़ी बाद खत्म हो जाती है।
5 .नंद निधि- इस निधि में रज और तम गुणों का मिश्रण होता है। माना जाता है कि यह निधि साधक को लंबी आयु व निरंतर तरक्की प्रदान करती है। इस निधि से संपन्न व्यक्ति अपनी तारीफ से बहुत खुश होता है। यह निधि साधको को लंबी आयु व निरंतर तरक्की प्रदान करती है।
6 .मकर निधि- इस निधि को तामसी निधि माना गया है। इस निधि से संपन्न व्यक्ति को अस्त्र- शस्त्र आदि को संग्रह करने वाला होता है। ऐसे व्यक्ति का राजा और शासन में हस्तक्षेप होता है। वह युद्ध में शत्रुओं पर भारी पड़ता है।
7.कच्छप निधि- इस निधि से युक्त व्यक्ति अपनी संपत्ति को छुपाकर रखता है,वह अपनी संपत्ति का उपभोग स्वयं करता है।
8 .शंख निधि- शंख निधि व्यक्ति के पास सिर्फ एक पीढ़ी तक होती है।
9 .खर्व निधि- इसे मिश्रित निधि भी कहते हैं नाम के अनुरूप ही यह निधि अन्य आठ निधियों का सम्मिश्रण होती है। इस निधि से संपन्न व्यक्ति को मिश्रित स्वभाव का कहा गया है।