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गुरू नानक जयंती विशेषः वो जगह बता दो जहां ईश्वर न हो

Wed, 28 Nov 2012 12:21 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
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गुरू नानक देव जी का जन्म दिन प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है। इसका कारण यह है कि आधुनिक हिन्दू धर्म को इन्होंने परिभाषित किया और समाज को नई रोशनी देने का काम किया। इन्होंने हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए एक संघ बनाया जो बाद में चलकर सिख संप्रदाय कहलाया जबकि यह हिन्दू और सिख को एक साथ देखना चाहते थे।
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नानक देव समाज को एक उच्च आदर्श की ओर ले जाना चाहते थे। यह धर्म को व्यवहारिकता पर केन्द्रित करने इच्छा रखते थे। अपने इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए नानक देव ने लोगों को तीन बातों की शिक्षा दी भगवान का स्मरण करो। भगवान की भक्ति का मतलब कर्म से हटना नहीं है इसलिए भक्ति के साथ काम पर भी ध्यान दो। तीसरी बात इन्होंने सिखायी सिर्फ अपने लिए ही मत सोचो, जरूरतमंदों की मदद करो।

नानक देव धर्म में दिखावा पसंद नहीं करते थे। यही कारण है कि अपने उपनयन संस्कार के समय इन्होंने जनेऊ धारण करने से मना कर दिया था। इनका मानना था कि ईश्वर सर्वत्र सर्वव्यापी है इसलिए ऐसा सोचकर कोई काम नहीं करना चाहिए कि यहां पर ईश्वर नहीं है।
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इस बात को इन्होंने अपनी अरब यात्रा के दौरान स्पष्ट किया। इस संदर्भ में कथा है कि अरब यात्रा के दौरान एक व्यक्ति ने नानक देव से कहा कि काबे की तरफ पैर करके न सोएं। इसके उत्तर में नानक देव ने कहा कि 'ऐसी दिशा या जगह बता दो जहां खुदा न हो'
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