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Gupt Navratri 2026: आज से गुप्त नवरात्रि प्रारंभ, जानिए इनका महत्व, पूजाविधि और नियम

Mon, 19 Jan 2026 12:29 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

  • आज 19 जनवरी से गुप्त नवरात्रि शुरू।
  • गुप्त नवरात्रि 27 जनवरी 2026 तक चलेगा।
  • शक्ति की साधना के लिए अत्यंत ही शुभ और फलदायी माना गया है।
  • गुप्त् नवरात्रि पर 10 महाविद्याओं की आराधना होती है।
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माघ गुप्त नवरात्रि- 19 जनवरी 2026 से प्रारंभ होकर 27 जनवरी 2026 तक चलेगा। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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Gupt Navratri 2026: सनातन परंपरा में माघ मास की गुप्त नवरात्रि को शक्ति की साधना के लिए अत्यंत ही शुभ और फलदायी माना गया है। 10 महाविद्या - काली, तारा, त्रिपुरसुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुरभैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला की साधना-आराधना का महापर्व आज 19 जनवरी 2026 से प्रारंभ होकर 27 जनवरी 2026 तक चलेगा।  इन्हें ‘गुप्त’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस अवधि में की जाने वाली साधना और पूजा आंतरिक व एकांत रूप से की जाती है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस समय की गई साधना शीघ्र फलदायी होती है और साधक को विशेष आध्यात्मिक सिद्धि प्रदान करती है।

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गुप्त नवरात्रि में क्या है दस महाविद्याओं की साधना का महत्व 
शास्त्रों के अनुसार गुप्त नवरात्रों में दस महाविद्याओं की पूजा का विधान है। ये दस महाविद्याएं काली, तारा, छिन्नमस्ता, षोडशी, भुवनेश्वरी, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला हैं। इन्हें आदि शक्ति के विभिन्न स्वरूप माना गया है, जो अलग-अलग दिशाओं और शक्तियों की अधिष्ठात्री देवियां हैं। तंत्र साधना से जुड़े साधक इन महाविद्याओं की उपासना गुप्त रूप से करते हैं, जिससे साधक की आंतरिक शक्ति जाग्रत होती है और जीवन के अवरोध दूर होते हैं।

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क्या है गुप्त नवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व
गुप्त नवरात्र में देवी दुर्गा की पूजा करने से जीवन में व्याप्त कष्टों का नाश होता है और साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। इन नौ दिनों में कठिन तप और भक्ति से महाविद्याओं को प्रसन्न किया जाता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि गुप्त नवरात्र में दुर्गा सप्तशती के तेरह अध्यायों का पाठ करने से धन-धान्य, संतान सुख और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही इस अवधि में शक्तिपीठों के दर्शन और कुलदेवी की आराधना विशेष पुण्य प्रदान करती है। रामचरितमानस का पाठ और हनुमानजी की उपासना भी इस समय अत्यंत शुभ मानी गई है, जिससे बल, बुद्धि और विद्या में वृद्धि होती है।

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कैसे होती है गुप्त नवरात्रि की पूजन विधि
गुप्त नवरात्र की पूजा ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद करनी चाहिए। लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर चावल से अष्ट कमल बनाएं और उस पर श्रीफल रखें। अपनी इष्ट देवी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। पूजन के समय माता को रोली, मोली, अक्षत और पुष्प अर्पित करें। लोंग और बताशे का भोग चढ़ाना शुभ माना जाता है। कलश स्थापना के समय माता को लाल पुष्प और चुनरी अर्पित करनी चाहिए। अंत में माता की आरती कर ‘सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके…’ मंत्र का जप करें, जिससे देवी शीघ्र प्रसन्न होती हैं।
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गुप्त नवरात्रि के क्या-क्या होते हैं नियम
गुप्त नवरात्र में की जाने वाली पूजा और साधना को गोपनीय रखना चाहिए, तभी उसका पूर्ण फल प्राप्त होता है। इस दौरान साधक को एक समय सात्विक भोजन करना चाहिए और भूमि शयन का पालन करना उत्तम माना गया है। ब्रह्मचर्य का पालन विशेष आवश्यक है। अष्टमी या नवमी तिथि पर कन्या और ब्राह्मण भोज कराने का विधान है। 



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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