फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नवरात्र से पहले मां दुर्गा को प्रसन्न करने की गुप्त रात्रि

विज्ञापन
विज्ञापन
परमात्मा की एक ही शक्ति है, माया। शास्त्रों के अनुसार यह अलग-अलग रूप धारण कर (नाना रूप धरो भूत्वा) तीनों लोकों में व्याप्त हैं। यही परम शक्ति सृष्टि सृजन के समय भवानी, युद्ध क्षेत्र में दुर्गा, क्रोध के समय काली और पुरुष रूप में विष्णु बन जाती हैं।
विज्ञापन


इन्हीं चार शक्तियों द्वारा परमेश्वर सृष्टि का सृजन, पालन और संहार करते हैं। शक्तिविहीन संसार शव के समान ही है, इसीलिए परब्रह्म परमेश्वर ने अपनी त्रिगुणमयी माया से संसार को आच्छादित किया हुआ है।

श्रावण की अष्टमी के दिन जिसे दुर्गाष्टमी कहा गया है, इस दिन माँ के सभी रूपों श्रीमहाकाली, श्रीमहालक्ष्मी, श्रीमहासरस्वती, कात्यायिनी, श्रीतारा, छिन्नमस्ता, श्रीविद्या, भुवनेश्वरी, भैरवी, बगला, धूमावती, त्रिपुर सुंदरी, मातंगी आदि की ′ॐ दुं दुर्गायै नमः′ मंत्र के द्वारा श्रद्धाभाव से पूजा-आराधना करनी चाहिए। यह शुभ दिन इस साल 23 अगस्त को है।
विज्ञापन

विज्ञापन

हर युग में रहा है गुप्‍त नवरात्र का महत्‍व

पौराणिक संदर्भों के अनुसार श्रावण शुक्ल अष्टमी (दुर्गाष्टमी) के दिन शक्ति आराधना प्रत्येक कल्पों, मन्वंतरों चतुर्युगों- सतयुग, त्रेता, द्वापर, कलियुग आदि से होता हुआ चला आ रहा है इस चराचर जगत में देव, दानव, राक्षस, गंधर्व, नाग, यक्ष, किन्नर, मनुष्य आदि इस दिन देवी का स्तवन करते हैं जिसके फलस्वरूप मां से मान-सम्मान, उत्तम संतान, शिक्षा स्वास्थ्यसुख, समृद्धि, यश, कीर्ति, विजय एवं आरोग्यता प्राप्त होती है।

विधान है कि अष्टमी को विविध प्रकार से भगवती का पूजन करते हुए भजन, कीर्तन, नृत्य आदि उत्सव मनाना चाहिए और नवमी को विविध प्रकार से पूजा-हवन कर कन्या पूजन करके उन्हें भोजन-प्रसाद आदि वितरित करना चाहिए।

आयोजन मोटे तौर पर कोई उत्पादक श्रम के रूप में नहीं दिखाई देते, लेकिन इनका महत्व परिणाम के रूप में निश्चित रूप से दिखता है।

कसौटी पर सोना कसते समय लगता है कि श्रम बेकार किया जा रहा है। लेकिन जब सोना खरा साब‌ित होता है, तो उसका मूल्य और महत्व कई गुना बढ़ जाता है। भजन पूजन को भी इसी रूप में समझना चाहिए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें