इस वर्ष बहनों के लिए खुशखबरी है कि उन्हें भाईयों को राखी बांधने के लिए शुभ मुहूर्त का इंतजार नहीं करना होगा। आमतौर पर हर वर्ष इस दिन भद्रा नक्षत्र होने के कारण रक्षासूत्र बंधने का मुहूर्त कम हो जाता है। इससे बहनों को राखी बांधने के लिए शुभ समय का इंतजार करना पड़ता है।
इस वर्ष भद्रा रक्षा बंधन से एक दिन पहले ही यानी पहली अगस्त, बुधवार को रात्रि 10 बजकर 49 मिनट पर समाप्त हो जाएगा और श्रवण नक्षत्र शुरू हो जाएगा। यह गुरुवार रात 10 बजकर 16 मिनट तक रहेगा।
श्रवण नक्षत्र और पूर्णिमा के संयोग में ही रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है। इसलिए इस बार रक्षाबंधन का त्योहार दो अगस्त गुरूवार को मनाया जाएगा। इस दिन कई शुभ योग भी बन रहे हैं जो भाई बहनों के इस त्योहार को और भी शुभ बना रहा है।
ज्योतिषाचार्य डा.प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार दो अगस्त गुरुवार के दिन श्रवण नक्षत्र है और चंद्रमा मकर राशि में है। सूर्य पुष्य नक्षत्र में होने से आनंद योग बन रहा है। इस दिन श्रीवत्स छत्र, पद्म, मातंग, अमृत आदि योग भी मौजूद रहेंगे।
इस वर्ष पूरे दिन रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जा सकता है किन्तु दोपहर दो बजे से 2.50 बजे तक अमृत तथा मातंग योग रहेगा। इस समय रक्षाबंधन का त्योहार मनाना शुभ होगा।
मिश्रपुरी के अनुसार रक्षासूत्र वह है जो मन, बुद्धि और शरीर की रक्षा करता है। स्वर्ण, रजत, तांबा, रेशम और कमल से उत्पन्न सूत्रों को कलाई पर बंधवाना चाहिए।
सूत से बने धागे के रक्षा सूत्र उत्तम होते हैं। तीन सूत, 360 सूत तथा 270 सूत को रक्षा के साथ जोड़ा गया है। चंद्रमा के हिसाब से 360 सूत सर्वोत्तम होते हैं। 24 ग्रंथी सूत्र अति पवित्र हैं।
शास्त्रों के अनुसार भद्रा अशुभ नक्षत्र है। यह यम की बहन है जो शुभ कार्यों में बाधा डालती है। इसके विपरीत श्रवण नक्षत्र बहुत ही शुभ होता है। इस नक्षत्र में मांगी गयी दुआ पूरी होती है, इसलिए रक्षाबंधन का त्योहार श्रवण नक्षत्र में मनाया जाता है।