आपने देखा होगा कि शादी के मौके पर दुल्हा किसी राजकुमार की तरह सज धजकर घोड़ी चढ़ता है। आपने कभी इस बात पर गौर किया है कि आखिर दुल्हा घोड़ी पर ही क्यों चढ़ता है। हाथी या दूसरे किसी अन्य सवारी पर क्यों नहीं चढ़ता।
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दुल्हा वास्तव में विवाह योग्य है
अगर आप यह सोचते हैं कि इसके पीछे कोई धार्मिक कारण है तो इस बात को मन से निकाल दीजिए। इसके पीछे धार्मिक नहीं बल्कि स्वास्थ्य और कुछ ऎसी मान्यता है जो यह दर्शाता है कि दुल्हा वास्तव में विवाह योग्य है।
इससे दुल्हे की उस क्षमता को भी जाना जाता है कि विवाह के बाद दुल्हा वैवाहिक जीवन की जिम्मेदारियों को निभा सकता है।
ऎसी मान्यता है कि घोड़ी एक चतुर और फुर्तीला प्राणी है। इसकी सवारी एक स्वस्थ व्यक्ति ही कर सकता है। घोड़ी की लगाम को थामे रहना यह दर्शाता है दुल्हा परिवार की डोर को संभाले रख सकता है।
इससे यह भी माना जाता है कि दुल्हा पत्नी के चंचल मन को भी अपने प्रेम और संयम से काबू में रखने में सफल रहेगा। जबकि एक मान्यता के अनुसार यह दुल्हे की साहस को दर्शाता है जो पत्नी की सुरक्षा करने की जिम्मेदारी को निभाने की क्षमता को व्यक्त करता है।