फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गीता जयंती आज, भगवान श्रीकृष्ण के ये 17 उपदेश, जिनमें है जीवन का सार

Sun, 08 Dec 2019 10:42 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 18
गीता जयंती 8 दिसंबर 2019 को है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, मार्गशीष शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन ही महाभारत काल में कुरुक्षेत्र के मैदान में भगवान श्रीकृष्ण ने धनुर्धारी अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। श्रीकृष्ण के द्वारा दिए गए गीता के उपदेश हमेशा-हमेशा के लिए प्रासंगिक हैं। उनके उपदेशों में जीवन को जीने की कला, प्रबंधन, जीवन का मर्म, कर्म आदि सबकुछ हैं। गीता जयंती के मौके पर हम आपको श्रीकृष्ण के 17 उपदेशों को बता रहे हैं जो इस प्रकार हैं..
विज्ञापन

2 of 18
महाभारत
1. आत्मा न तो जन्म लेती है और न ही मरती है।  (२.२०)
विज्ञापन

3 of 18
महाभारत गीता उपदेश
2. जो अपने मन को नियंत्रित नहीं करते उनका मन ही उनका सबसे बड़ा शत्रु है।  (६.६)

4 of 18
महाभारत
3. हर इंसान को अपने नियत कर्म करने चाहिए, क्योंकि कर्म न करने की अपेक्षा कर्म करना श्रेष्ठ है।  (३.८)
विज्ञापन

5 of 18
महाभारत
4. यदि वास्तविक शांति प्राप्त करनी है तो इच्छाओं से ऊपर उठना पड़ेगा।  (२.७१)
विज्ञापन

6 of 18
महाभारत
5. वर्ण विभाजन (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र) संबधित कर्म के अनुसार किये गए हैं ।  (४.१३)
विज्ञापन

7 of 18
महाभारत
6. भगवान पर किसी कर्म का प्रभाव नहीं पड़ता और न ही वो किसी कर्म बंधन में बंधते हैं।  (४.१४)

8 of 18
महाभारत
7. ज्ञान को प्राप्त करने के लिए विनम्रता आवश्यक है।  (४.३४)

9 of 18
महाभारत
8. दुष्ट तथा मुर्ख लोग भगवान की शरण ग्रहण नहीं करते।  (७.१५)

10 of 18
महाभारत
9. प्रकृति निरंतर परिवर्तित होती रहती है। (८.४)

11 of 18
महाभारत
10. अंत समय में जो जिस भाव का स्मरण करता है वो उसी भाव को प्राप्त होता है ।  (८.६)

12 of 18
पांडव
11. भगवान को जानने के लिए एकमात्र साधन हैं भक्ति ।  (१८.55)

13 of 18
महाभारत
12. भगवान सबके ह्रदय में विराजमान हैं और उन्ही से ही स्मृति तथा विस्मृति आती है। (१५.१५)

14 of 18
महाभारत
13. जहाँ भगवन हैं वहां ऐश्वर्य, विजय और अलौकिक शक्ति हमेशा रहती है ।  (१८.७८)

15 of 18
Pandav Mahabharat
14. काम, क्रोध तथा लोभ ये तीन नरक के द्वार हैं ।  (१६.२१)

16 of 18
Mahabharat Bheem
15. इस संसार में सारे जीव भगवान के ही अंश हैं ।  (१५.७)

17 of 18
Pandav Mahabharat
16. भगवान समस्त आध्यात्मिक तथा भैतिक जगतों के कारण हैं और उनसे ही प्रत्येक वस्तु उत्पन्न होती है।  (१०.८)
विज्ञापन

18 of 18
Mahabharat Bheem - फोटो : Youtube
17. जिनकी बुद्धि अनेक शाखाओं में विभाजित रहती है वो अपने लक्ष्य को कभी प्राप्त नहीं कर पाते।  (२.४१)
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें