गंगा सप्तमी 30 अप्रैल, गुरुवार के दिन है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन गंगा मां की पूजा करनी चाहिए। इस दिन गंगा मां की पूजा करने से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है और मृत्यु पश्चात मोक्ष की प्राप्ति होती है। आइए, आज मां गंगा स्तोत्रम का पाठ करते हैं। इसका पाठ करने से मां गंगा का आशीर्वाद मिलता है....
गांगं वारि मनोहारि मुरारिचरणच्युतम्।
त्रिपुरारिशिरश्चारि पापहारि पुनातु माम्॥
देवि सुरेश्वरि भगवति गङ्गे
त्रिभुवनतारिणि तरलतरङ्गे ।
शङ्करमौलिविहारिणि विमले
मम मतिरास्तां तव पदकमले ॥1॥
भागीरथि सुखदायिनि मातस्तव
जलमहिमा निगमे ख्यातः ।
नाहं जाने तव महिमानं
पाहि कृपामयि मामज्ञानम् ॥ 2॥
हरिपदपाद्यतरङ्गिणि गङ्गे
हिमविधुमुक्ताधवलतरङ्गे ।
दूरीकुरु मम दुष्कृतिभारं
कुरु कृपया भवसागरपारम् ॥ 3॥
तव जलममलं येन निपीतं,
परमपदं खलु तेन गृहीतम् ।
मातर्गङ्गे त्वयि यो भक्तः
किल तं द्रष्टुं न यमः शक्तः ॥ 4॥
स्वस्थ, समृद्ध और सुखद जीवन के लिए हरिद्वार में करवाएं, माँ गंगा की आरती
पतितोद्धारिणि जाह्नवि गङ्गे
खण्डितगिरिवरमण्डितभङ्गे ।
भीष्मजननि हे मुनिवरकन्ये,
पतितनिवारिणि त्रिभुवनधन्ये ॥ 5॥
कल्पलतामिव फलदां लोके,
प्रणमति यस्त्वां न पतति शोके ।
पारावारविहारिणि गङ्गे
विमुखयुवतिकृततरलापाङ्गे ॥ 6॥
तव चेन्मातः स्रोतःस्नातः
पुनरपि जठरे सोऽपि न जातः ।
नरकनिवारिणि जाह्नवि गङ्गे
कलुषविनाशिनि महिमोत्तुङ्गे ॥ 7॥
स्वस्थ, समृद्ध और सुखद जीवन के लिए हरिद्वार में करवाएं, माँ गंगा की आरती