ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी को हस्त नक्षत्र में मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। इसी दिन भागीरथ उन्हें धरती पर लाए थे और इस दिन को गंगा दशहरा के नाम से जाना जाने लगा। इस बार गंगा दशहरा रविवार चार जून को है। वैसे लंबे समय बाद गंगा दशहरा हस्त नक्षत्र में पड़ा है। इस दिन लोग गंगा में नहाते है और दान पुण्य करते हैं।
गंगा दशहरा सर्वार्थ सिद्घि और अमृत सिद्घि योग के साथ मनाया जाएगा। ज्योतिषियों के अनुसार तीन जून को सुबह 6:52 मिनट से ही दशमी लग गई है, जो अगले दिन यानि चार जून तक सुबह 8:03 मिनट तक रहेगी।
ऐसे करें पूजा
गंगा दशहरा के दिन गंगा या किसी पवित्र नदी में खड़े होकर 'ऊं नमह शिवाये नारायनये दशहराये गंगाये नमह' का दस बार जाप करना चाहिए। अगर आपके आस पास कोई नदी है तो ऐसी स्थिति में घर में स्नान के पानी में गंगा जल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद हाथ में फूल लेकर 'ऊं नमो भगवते ऐड्म ह्री श्री हिली हिली मिली मिली गंगे मां पावय पावय स्वाहा' मंत्र का पांच का उच्चारण करें और फिर फूल को पानी में अर्पित कर दें। इसके साथ ही अपने पितरों की तृप्ति के लिए प्रार्थना करें।
ये भी करें
स्नान के समय दस दीपों का दान करना ना भूलें। वहीं नदी में दस डुबकी भी लगाएं। इस दिन किया गया कार्य पितरों के मोक्ष के लिए अच्छा होता है।