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इन कारणों से गणेश जी का सिर कटा और बन गए गजमुख

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मंगलमूर्ति गणेश जी की छवि अद्भुत। इनका पूरा शरीर मनुष्य की तरह है जबकि सिर एक हाथी की तरह है। गणेश जी का जब जन्म हुआ था तब गणेश ऐसे नहीं थे। उस समय गणपति के सिर पर भी मनुष्य की भांति सिर था।
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लेकिन गणेश जी अधिक समय तक उस सिर के साथ नहीं रह पाए। गणेश जी ने अपने लिए कुछ और ही तय कर रखा था। समय और परिस्थितियों के कारण गणेश जी का मनुष्य रुपी सिर कट गया और फिर गणपति को पुनः जीवित करने के लिए देवताओं ने गणपति के सिर पर हाथी का सिर लगा दिया। इसके बाद गणेश जी गजानन कहलाने लगे।

गणेश जी के सिर कटने के पीछे कई कथाएं हैं और मान्यताएं हैं। आइए जानें क्या कहते हैं हमारे शास्त्र पुराण, कैसे बने गणेश जी गजानन।

शन‌ि की दृष्ट‌ि से कटा गणेश का स‌िर

एक कथा है क‌ि जब गणेश जी का जन्म हुआ तो श‌िवलोक में उत्सव मनाया जा रहा था। गणेश जी को आशीर्वाद देने के ल‌िए सभी देवी-देवता पधारे इनमें शन‌ि देव भी शाम‌िल थे। उत्सव से व‌िदा लेते समय शन‌ि महाराज ने भागवान व‌िष्‍णु, ब्रह्मा और श‌िव को प्रणाम क‌िया।

शन‌ि देव ने अंत देवी पार्वती को प्रणाम ‌क‌िया और गणेश जी को देखे ब‌िना ही आशीर्वाद देकर जाने लगे। इस पर देवी पार्वती ने शन‌ि महाराज को टोकते हुए कहा क‌ि शन‌ि महाराज आप मेरे पुत्र को ब‌िना देखे क्यों जा रहे हैं।

श‌न‌ि महाराज ने कहा क‌ि माता मेरा नहीं देखना ही मंगलकारी है। अगर मेरी दृष्ट‌ि गणेश जी पर पड़ी तो भारी अमंगल होगा। देवी पार्वती ने शन‌ि महाराज को ताना मारते हुए कहा क‌ि तुम मेरे पुत्र के जन्म से प्रसन्न नहीं हो इसल‌िए बहाने बना रहे हो। मेरी आज्ञा है क‌ि तुम मेरे पुत्र को देखो, कुछ भी अमंगल नहीं हो।

देवी पार्वती की आज्ञा का पालन करते हुए जैसे ही शन‌ि महाराज ने गणेश जी को देखा श‌िवलोक में हहाकार मच गया। गणेश जी का स‌िर कट कर हवा में व‌िलीन हो गया। इस दृष्य को देखकर देवी पार्वती बेहोश हो गई। ऐसी स्थ‌ित‌ि में भगवान व‌िष्‍णु ने एक हथ‌िनी के नवजात बच्‍चे का स‌िर काटकर गणेश जी के धड़ से जोड़ द‌िया और गणेश जी गजानन कहलाने लगे।

एक शाप ज‌िसने गणेश जी को बना द‌िया गजमुख

माली और सुमाली नाम के दो दैत्य भगवान श‌िव के भक्‍त थे। श‌िव भक्त‌ि के प्रभाव से यह शक्त‌िशाली हो गए थे और देवताओं को परेशान करने लगे थे। इससे भगवान सूर्य ने माली और सुमाली से युद्ध क‌िया।

भगवान श‌िव जो जब पता चला क‌ि सूर्य उनके भक्तों को मारने पर तुले हैं तो क्रोध‌ित हो उठे और त्र‌िशूल से सूर्य पर प्रहार कर द‌िया।

सूर्य देव इससे अचेत होकर ग‌िर पड़े। सूर्य देव के प‌िता कश्यप ऋष‌ि ने जब देखा क‌ि भगवान श‌िव ने अपने त्र‌िशूल से उनके पुत्र को मृत्यु के करीब पहुंचा द‌िया है तो क्रोध‌ित होकर श‌िव जी को शाप दे द‌िया।

कश्‍यप ने कहा क‌ि, ज‌िस प्रकार मेरे पुत्र को आपने मृत्यु के करीब पहुंचा द‌िया है उसी प्रकार आपको भी अपने पुत्र की दुर्दशा देखनी होगी। इस शाप के कारण ही गणेश जी का स‌िर कटा और गजमुख बने।
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भगवान श‌िव का क्रोध बना गणेश जी के स‌िर कटने का कारण

एक कथा है क‌ि एक समय भगवान श‌िव कैलाश से कहीं दूर गए थे। उस समय देवी पार्वती ने आटे से एक बालक का न‌िर्माण क‌िया। अपनी रचना को देखकर देवी पार्वती अत‌ि उत्साह‌ित हो गई और उसमें जान डाल दी। देवी पार्वती ने उस बालक को गणेश नाम द‌िया।

एक द‌िन देवी पार्वती ने उस बालक से कहा क‌ि मैं स्नान करने जा रही हूं। जब तक मैं स्नान करके नहीं आती हूं तब तक तुम द्वार पर बैठकर पहरा दो। इस बीच कोई भी आए उसे अंदर मत आने देना। गणेश जी माता की आज्ञा पालन करने के ल‌िए द्वार पर बैठ गए।

संयोगवश उसी समय भगवान श‌िव कैलाश पर लौट आए। श‌िव जी जैसे ही गुफा में प्रवेश करने के ल‌िए आगे बढ़े पहरा दे रहे गणेश जी ने उन्हें रोक द‌िया। इसके बाद गणेश जी और श‌िव जी का युद्ध शुरु हो गया। अंत में भगवान श‌िव ने अपने त्र‌िशूल से गणेश जी का स‌िर काट द‌िया।

इसके बाद तो देवी पार्वती ने हाहाकार मचा द‌िया। देवी पार्वती के क्रोध को शांत करने के ल‌िए भगवान व‌‌िष्‍णु ने एक हाथी के बच्चे का स‌िर लाकर गणेश जी के धड़ से जोड़ द‌िया और गणेश जी जीव‌ित हो उठे।
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