पुराणों के अनुसार कलियुग के अंत में भगवान का कल्कि अवतार होने वाला है। लेकिन कलयुग में भगवान विष्णु अकेले नहीं आएंगे उनके साथ विघ्नहर्ता गणेश जी का भी अवतार होगा। जिस प्रकार कल्कि भगवान देवदत्त नाम के घोड़े पर सवार होकर पाप का नाश करेंगें।
उसी प्रकार गणेश जी भी नीले रंग के घोड़े पर सवार होकर पापियों का विनाश करेंगे और सतयुग की नई शुरूआत होगी। गणेश पुराण में गणेश जी के इस अवतार का विस्तार से वर्णन किया गया है। इस पुराण में भगवान शिव ने पार्वती से कहा है कि कलयुग के अंत में भगवान गणेश चारभुजा से युक्त होकर अवतार लेंगे।
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इस अवतार में गणेश जी का नाम धूम्रवर्ण एवं शूर्पकर्ण होगा। भगवान के हाथों में खड्ग होगा। अपनी इच्छा से गणेश जी सेना और अस्त्र-शस्त्र उत्पन्न करेंगे। पापियों के बढ़ते मनोबल और धर्म की हानि से गणपति के नेत्रों में क्रोध भरा रहेगा। पापियों को नष्ट करने के लिए शूर्पकर्ण आंखों से अग्नि की वर्षा करेंगे।
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पापियों का नाश करने के बाद जब गणेश जी का क्रोध शांत होगा तब अधर्मियों के डर से पर्वत की कंदराओं में छुपे हुए संतजनों को भगवान गणेश आशीर्वाद देंगे और उनके हाथों में धर्म की पुनःस्थापना का काम सौंपेंगे। इस तरह फिर से सतयुग का आरंभ गणेश जी के हाथों से होगा।
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