पंचांग के बारह महीनों में पहला महीना चैत्र का होता है, तो आखिरी माह फाल्गुन का। फाल्गुन को ऊर्जा और यौवन का माह भी माना जाता है। इस वर्ष फाल्गुन माह 10 फरवरी, सोमवार से शुरू होकर 09 मार्च, सोमवार तक रहेगा। यह वसंत का समय होता है। प्रकृति की विविध छटाओं से अलसाए माहौल में नई ऊर्जा का संचार हो उठता है।
प्रकृति पूरी ऊर्जा, उत्साह से महक उठती है, तो लोगों में भी एक नई ऊर्जा और मस्ती का संचार होता है। कुदरत के नजरिए से फाल्गुन मास जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही यह माह धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इस माह कई त्योहार पड़ रहे हैं,
जैसे फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को जानकी जयंती और सीता अष्टमी। फाल्गुन कृष्ण पक्ष एकादशी को विजया एकादशी के नाम से जाना जाता है।
तीन दिन बाद चतुर्दशी को भोलेनाथ की आराधना का पर्व महाशिवरात्रि मनाया जाता है।
धार्मिक दृष्टि से अमावस का भी बहुत महत्व होता है। दान, पुण्य, तर्पण आदि के लिहाज से अमावस्या खास फलदायी मानी गई है। फाल्गुन शुक्ल एकादशी को आमलकी एकादशी कहा जाता है। सुख समृद्धि व मोक्ष की कामना हेतु, इस दिन उपवास किया जाता है और विष्णु भगवान की पूजा की जाती है। रात को जागरण करते हुए द्वादशी के दिन व्रत का पारण किया जाता है। फाल्गुन के अंतिम दिन पूर्णिमा या मास पूरा होने की द्योतक तिथि को होलिका पूजन और दहन के बाद अगले दिन रंग खेलने का रिवाज जगजाहिर है।