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Dussehra 2020: रावण ने मरने से पहले लक्ष्मण को दिए थे ये पांच उपदेश

Wed, 14 Oct 2020 06:48 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
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दशहरा 2020: अधर्म पर धर्म की जीत का पर्व - फोटो : पीटीआई
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Dussehra 2020: 25 अक्तूबर को दशहरा पर्व मनाया जाएगा। दशहरा के दिन रावण के पुतले का दहन किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार ये त्योहार अधर्म पर धर्म की, और असत्य पर सत्य की जीत का पर्व है। कहते हैं रावण बेहद ही पराक्रमी था। अगर विभीषण रावण का भेद नहीं बताता तो भगवान श्रीराम को उसे मार पाना कठिन था। उसे शस्त्र के साथ-साथ कई शास्त्रों का गहरा ज्ञान था इसलिए उसे प्रकांड विद्वान पंडित एवं महाज्ञानी कहते थे। अपने ज्ञान और बाहुबल के अहंकार में वह इतना चूर हो गया कि स्वयं ही अपना सर्वनाश कर बैठा। धार्मिक मान्यता है कि रावण ने मरने से पहले भगवान राम के छोटे भाई लक्ष्मण को कुछ उपदेश दिए थे, जो आज के समय में भी लोगों के लिए सफलता की कुंजी है।

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हालांकि रावण जिस समय मरणासन्न अवस्था में था, तब भगवान राम ने लक्ष्मण से कहा कि इस संसार से नीति, राजनीति और शक्ति का महान पंडित विदा ले रहा है, तुम उसके पास जाओ और उससे जीवन की कुछ ऐसी शिक्षा ले लो जो और कोई नहीं दे सकता। प्रभु राम की बात मानकर लक्ष्मण मरणासन्न अवस्था में पड़े रावण के सिर के पास जाकर खड़े हो गए। 

लक्ष्मण काफी देर तक रावण के सिर के पास खड़े रहे, लेकिन रावण ने उनसे कुछ नहीं कहा। इसके बाद लक्ष्मण वापस लौट आए और प्रभु श्रीराम से सारी बातें बताई। तब भगवान राम ने लक्ष्मण से कहा कि अगर किसी से ज्ञान प्राप्त करना हो तो उसके चरणों के पास खड़े होना चाहिए न कि सिर के पास। यह बात सुनकर लक्ष्मण वापस रावण के पास गए और उसके पैरों के पास खड़े हो गए। उस समय महापंडित रावण ने लक्ष्मण को 5 ऐसी बातें बताई जो जीवन में सफलता की कुंजी है। 

  1. रावण का पहला उपदेश यह था कि इंसान को कभी भी अपने शत्रु को खुद से कमजोर नहीं समझना चाहिए, क्योंकि कई बार जिसे हम कमजोर समझते हैं वहीं हमसे ज्यादा ताकतवर साबित हो जाता है।
  2. रावण का दूसरा उपदेश था, 'खुद के बल का दुरुपयोग कभी भी नही करना चाहिए। घमंड इंसान को ऐसे तोड़ देता है, जैसे दांत किसी सुपारी को तोड़ता है'। 
  3. रावण का तीसरा उपदेश था,' इंसान को हमेशा अपने हितैषियों की बातें माननी चाहिए, क्योंकि कोई भी हितैषी अपनों का बुरा नहीं चाहता'। 
  4. रावण का चौथा उपदेश था, 'हमें शत्रु और मित्र की हमेशा पहचान करनी चाहिए। कई बार जिसे हम अपना मित्र समझते हैं वे ही हमारे शत्रु साबित हो जाते हैं और जिसे हम पराया समझते हैं असल मे वे ही हमारे अपने होते हैं। 
  5. रावण का पांचवां और सबसे बेहतरीन उपदेश था, 'हमें कभी भी पराई स्त्री पर बुरी नजर नहीं डालनी चाहिए, क्योंकि पराई स्त्री और बुरी नजर डालने वाला इंसान नष्ट हो जाता है'। 
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