फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Dhanteras 2020: धनतेरस पर मां लक्ष्मी की यह कथा जरूर पढ़नी चाहिए, आती है सुख-समृद्धि

Thu, 29 Oct 2020 12:24 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
धनतेरस 2020: कार्तिक मास की त्रियोदशी तिथि को धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। इस बार धनतेरस का त्योहार 13 नवंबर को है। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस के रुप में मनाया जाता है। इस बार धनतेरस का त्योहार 13 नवंबर को मनाया जाएगा। इसी दिन से दीपोत्सव यानि दिवाली का त्योहार आरंभ हो जाता है। धनतेरस पर नए बर्तन और सामान खरीदने की परंपरा है। इस त्योहार पर मुख्यतः भगवान धनवंतरी की पूजा करने का प्रावधान है। समुद्र मंथन के समय धनवंतरी भगवान अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। समुद्र मंथन के चौदह रत्नों में से मां लक्ष्मी भी एक हैं। इसलिए धनतेरस पर लक्ष्मी जी की पूजा भी की जाती है। जल से उत्पन्न होने के कारण लक्ष्मी जी चंचला हैं वे एक स्थान पर नहीं ठहरती हैं। इससे संबंधित एक कथा मिलती है। इस कथा को धनतेरस की पूजा के बाद अवश्य पढ़ना चाहिए। जानते हैं धनतेरस पर मां लक्ष्मी की कथा...

विज्ञापन

Dhanteras 2020
एक बार भगवान विष्णु के मन में मृत्यु लोक अर्थात धरती पर भ्रमण करने का विचार आया, तो मां लक्ष्मी भी उनके साथ आने को कहने लगी। तब विष्णु जी ने कहा कि आप अगर मेरे साथ आना चाहती हैं तो आपको मेरे कहे अनुसार चलना होगा। लक्ष्मी जी ने उनकी बात मान ली और धरती लोक पर आ गई। एक स्थान पर आकर विष्णु जी ने उनसे कहा कि तुम यहीं ठहरो जब तक मैं वापस न आऊं यही पर मेरी प्रतीक्षा करना। इतना कहने के पश्चात विष्णु जी ने दक्षिण दिशा की ओर प्रस्थान किया। मां लक्ष्मी के मन में उत्सुकता हुई कि विष्णु जी उन्हें अपने साथ क्यों नहीं ले गए। वे भी उनके पीछे चल दी। चलते हुए रास्ते में उन्हें सरसों के लहलहाते खेत नजर आए मां लक्ष्मी पीले फूलों को देखकर अति प्रसन्न हो गई। फूलों से श्रंगार करने के पश्चात लक्ष्मी जी आगे की ओर चल दी। एक जगह गन्ने के खेत देखकर वे वहीं पर ठहर गई और किसान के खेत से गन्ने तोड़ कर खाने लगी।
विज्ञापन

शुभ धनतेरस - फोटो : अमर उजाला
जब विष्णु जी ने उन्हें देखा तो अत्यंत क्रोधित हुए उन्होंने लक्ष्मी जी से कहा कि तुमने मेरी आज्ञा का उल्लंघन किया है साथ ही किसान के खेत से गन्ने चुराकर खाएं हैं, अतः तुम 12 वर्षों तक यहीं धरती लोक पर रहकर किसान की सेवा करो। इतना कहने के बाद विष्णु जी वापस क्षीरसागर चले गए। मां लक्ष्मी किसान के घर में निवास करने लगी जिससे वह धन-धान्य से परिपूर्ण हो गया। जब 12 वर्ष पूर्ण होने पर 13वां वर्ष लगा तो विष्णु जी लक्ष्मी जी को लेने आए परंतु किसान ने उन्हें भेजने से इंकार कर दिया। तब विष्णु जी ने किसान को समझाया की मेरे शाप के कारण लक्ष्मी जी अब तक यहां थी। वे चंचला हैं एक स्थान पर नहीं ठहरती हैं। लेकिन किसान उन्हें भेजने को राजी न हुआ। जिसके बाद लक्ष्मी जी ने किसान से कहा कि कल तेरस है, अपने घर की साफ सफाई करके अच्छे से स्वच्छ करना। उसके पश्चात संध्या के समय घी का दीपक जलाकर मेरी पूजा अर्चना करना। एक तांबे के पात्र में सिक्के भरकर रखना में उसी कलश में पूरे वर्ष निवास करुंगी। किसान ने उनके कहे अनुसार ऐसा ही किया और वह धन-धान्य से संपन्न हो गया। इसलिए धनतेरस को जो भी विधि-विधान से लक्ष्मी जी का पूजन करता है, साल भर उसका घर धन-धान्य से भरा रहता है। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें