फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Dhanteras 2020: धनतेरस पर यम का दीप जलाने का महत्व, जानिए पूरी कथा

Sun, 08 Nov 2020 06:59 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
Dhanteras 2020
विज्ञापन

हर वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। इस वर्ष धनतेरस का त्योहार 13 नवंबर को मनाया जाएगा। कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के समय इस दिन धनवंतरी भगवान अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। माना जाता है कि इस दिन जो भी सामान खरीदते हैं उसमें तेरह गुना वृद्धि होती है। धनतेरस पर नए बर्तन और नया सामान खरीदने की परंपरा है। इस दिन धनवंतरी भगवान के साथ मां लक्ष्मी और कुबेर का पूजन किया जाता है, लेकिन क्या आपको पता है कि इस दिन यम के नाम का दीपक भी जलाया जाता है। वैसे तो नरकचतुर्दशी के दिन यम का दीप जलाते हैं किंतु त्रयोदशी के दिन भी यम का दीप जलाने का महत्व माना गया है। मान्यता है कि धनतेरस पर यम के नाम का दीपक प्रज्वलित करने से पूरे परिवार पर अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। इसका जिक्र पुराणों में भी मिलता है साथ ही इस संबंध में एक पौराणिक कथा भी मिलती है। जानते हैं कि धनतेरस पर यम के नाम का दिया क्यों जलाया जाता है।

विज्ञापन

Dhanteras 2020
धनतेरस के संबंध में स्कंदपुराण में एक श्लोक है जो इस तरह से है। 
कार्तिकस्यासिते पक्षे त्रयोदश्यां निशामुखे।
यमदीपं बहिर्दद्यादपमृत्युर्विनिश्यति। 

इस श्लोक का अर्थ है कार्तिक मास में कृष्णपक्ष की त्रयोदशी तिथि को संध्याकाल में घर के बाहर यमदेव के उद्देश्य से दीप रखने से मृत्यु का नाश होता है। 

पद्मपुराण में भी इस संबंध में उल्लेख मिलता है। 
कार्तिकस्यासिते पक्षे त्रयोदश्यां तु पावके। 
यमदीपं बहिर्दद्यादपमृत्युर्विनश्यति। 

इसका अर्थ है कि कार्तिक मास में कृष्णपक्ष की त्रयोदशी तिथि को घर के बाहर यमदेव के उद्देश्य से दीप जलाने से मृत्यु का विनाश होता है। 


 

धनतेरस पर यम का दीपदान करने के विषय में पुराणों में एक कथा मिलती है, जिसके अनुसार एक समय यमराज ने अपने दूतों से पूछा कि क्या कभी तुम्हें प्राणियों के प्राण हरण करते समय किसी पर दया नहीं आती है। पहले यमदूत संकोच में पड़ गए और कहा कि नहीं महाराज। तब यमराज ने उनसे दोबारा यही प्रश्न किया तो उन्होंने बताया कि एक बार एक ऐसी घटना घटी कि जिसे देखकर हमारा हृदय भी कांप उठा था। तब उन्होंने आगे कहा कि हेम नामक राजा की पत्नी ने एक पुत्र को जन्म दिया। उसके जन्म के बाद ज्योतिषियों ने नक्षत्र गणना करके राजा को बताया कि यह बालक जब भी विवाह करेगा, उसके चार दिन बाद ही इसकी मृत्यु हो जाएगी।

यह जानने के पश्चात उस राजा ने बालक को यमुना तट की एक गुफा में ब्रह्मचारी के रूप में रखकर उसका लालन पालन किया, लेकिन एक दिन जब महाराजा हंस की युवा पुत्री यमुना तट पर घूम रही थी। उस ब्रह्मचारी युवक की दृष्टि उस कन्या पर पड़ी वह उस पर मोहित हो गया और उन्होंने गंधर्व विवाह कर लिया। ज्योतिष गणना के अनुसार जैसे ही विवाह के बाद चौथा दिन पूरा हुआ राजकुमार की मृत्यु हो गई। अपने पति की मृत्यु देखकर उसकी पत्नी अत्यंत बिलख-बिलखकर विलाप करने लगी। उस नवविवाहिता का करुण विलाप सुनकर हमारा हृदय भी कांप उठा।
 
विज्ञापन

यमदूतों ने कहा कि उस राजकुमार के प्राण हरण करते समय हमारे भी आंसू नहीं रुक पा रहे थे। तभी एक यमदूत ने यमराज से पूछा कि क्या अकाल मृत्यु से बचने का कोई उपाय नहीं है? इस पर यमराज ने बताया कि एक उपाय है। धनतेरस के दिन अकाल मृत्यु से छुटकारा पाने के लिए व्यक्ति को पूजन और दीपदान विधि-विधान के साथ करना चाहिए। जिस जगह धनतेरस पर दीपदान किया जाता है वहां के लोगों को अकाल मृत्यु का भय नहीं सताता है। इस कारण ही धनतेरस पर यम के नाम का दीपदान करने की परंपरा है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें