जीवन के अनंत यात्रा जो पूर्ण करे, जो अध्यात्म से लेकर भौतिक जगत के उचित मार्ग को अलौकिक करे , जो अंधकार से उजाले की ओर ले जाए वह है गुरु जहां आप आकर पूर्ण हो जाते हैं समर्पित हो जाते है जहां आप अपने आप को ढूंढ लेते हैं वह सिर्फ गुरु ही है जो आप को आपसे ही मुलाकात करवाता हैं।
श्री गुरु महिमा श्री स्कन्दपुराणांतर्गत शिव पार्वती संवाद !!
श्री महादेव उवाच
गुकारश्चान्धकारो हि रुकारस्तेज उच्यते !
अज्ञानग्रासकं ब्र्ह्मा गुरुरेव न संशय : !!
" गु " शब्द का अर्थ है अन्धकार अज्ञान और " रु " शब्द का अर्थ है प्रकाश ज्ञान । अज्ञान को नष्ट करनेवाला जो ब्रह्मरूप प्रकाश है वह गुरु है इसमें कोई संशय नहीं ।
गुरुपूर्णिमा के अवसर पर गुरु दीक्षा लेना अपने आप मे अमृत प्राप्त करने जैसा है। इस अवसर पर माता पिता से लेकर अध्यात्म जगत के गुरु को अभिवादन करें। इतिहास में गुरुदेवों की महिमा रही है की गुरु का हाथ जिसके मस्तक और जीवन पर पड़ा उस शिष्य से वो गुरु को भी गर्व हुआ, धन्य है ऐसे गुरु।
गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व की सभी को शुभकामनाएं।