देवशयन एकादशी पर भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में रहते हैं।
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Devshayani Ekadashi 2026: शनिवार, 25 जुलाई को आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी तिथि है, जिसमें भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में जाते हैं, जिस कारण से इसे देवशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस देवशयनी एकादशी के साथ ही चातुर्मास शुरू हो जाता है जिसमें कई तरह के नियमों का पालन किया जाता है।
भगवान विष्णु चार माह तक रहते हैं पाताल लोक
देवशयनी एकादशी यानी जिसमें भगवान विष्णु योग निद्रा में होते हैं और चार माह के लिए क्षीरसागर में योग निद्रा में रहते हैं। वहीं दूसरी कथा के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी से भगवान विष्णु अपने एक रूप में राजा बलि के यहां अपने वचन को पूरा करने के लिए चार माह के लिए पाताल लोक में रहते हैं। दूसरे रूप में भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग पर शयन करते हैं। भगवान यहां पर इस स्थिति में कार्तिक महीने की देवउठनी एकादशी तक रहते हैं। इसके बाद शुभ विवाह और शुभ कार्य दोबारा से शुरू हो जाते हैं।
भगवान विष्णु चार माह योग निद्रा में
चातुर्मास में भगवान विष्णु चार महीने तक योग निद्रा में रहते हैं। यहां योगनिद्रा का अर्थ है भगवान के सोने और सृष्टि के काम चार महीनों के लिए बंद से नहीं है। इस दौरान बड़े उत्सव और आयोजन को रोककर मन, आदतों और सयंम रखने का होता है। चातुर्मास में विवाह और दूसरे मांगलिक काम वर्जित हो जाते हैं लेकिन जप, तप, दान और पूजा का महत्व बढ़ जाता है।
चातुर्मास का महत्व
चातुर्मास में भगवान विष्णु की पूजा करने का विशेष महत्व होता है। चातुर्मास में भगवान विष्णु के विराट रूप की पूजा करने का महत्व होता है। चातुर्मास में दीपदान और जागरण का महत्व होता है।
देवशयनी एकादशी पूजा महत्व
देवशयनी एकादशी पर सुबह स्नान करके साफ और स्वच्छ कपड़े पहनें और व्रत-पूजा का संकल्प लें। इसके बाद भगवान विष्णु को फूल, फल और दीप अर्पित करें। इस एकादशी पर भगवान विष्णु के नाम का जप और कथा सुनना चाहिए। एकादशी के अगले दिन द्वादशई तिथि पर व्रत खोला जाता है जिसे पारण करते हैं। व्रत खोलने से पहले दान जरूर करें।