लाइफ ओके पर चल रहा धार्मिक सीरियल 'देवों के देव महादेव' को लोग काफी पंसद कर रहे हैं। संभव है कि यह सीरियल आपको भी अच्छा लग रहा हो। लेकिन आपको सीरियल अच्छा लगे इसके लिए शास्त्रों, पुराणों और धार्मिक मान्यताओं के साथ बड़ी छेड़-छाड़ की जा रही है। ऐसा हम नहीं कई पण्डितों का ऐसा मानना है। पण्डित जयगोविंद शास्त्री बताते हैं कि इस सीरियल में कई ऐसे प्रसंग को दिखाये गये है जिनका उल्लेख किसी भी पुराण और शास्त्र में नहीं है। यह दर्शकों को भ्रमित कर रहा है।
पण्डित जी ने शास्त्रीय कथाओं और उल्लेखों के आधार पर कहा कि शिव पुत्री अशोक सुन्दरी का नाम उन्हें कहीं नहीं मिला। संभवतः सीरियल को रोचक बनाने के लिए 'देवों के देव महादेव' में अशोक सुन्दरी नामक काल्पनिक पात्र उतारा गया है। शास्त्रों में अशोक सुन्दरी के पति के रूप में नहुष का जिक्र किया गया है। जबकि नहुष की पत्नी का बिरजा देवी हैं। इनकी संतान के नाम यति, ययाति, संयाति, आयाति, वियाति या कृति थे। नहुष एक धर्मात्मा राजा थे और उन्हें शास्त्रज्ञान तथा पुण्य के कारण कुछ समय के लिए इन्द्र का आसन भी प्राप्त हुआ था।
इस धारावाहिक में रावण और शिव के प्रसंग में भी तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर दिखाया गया है। पुराणों में उल्लेख है कि पार्वती ने शिव से अपने लिए भवन का आग्रह किया। इस पर भगवान शिव ने पार्वती से कहा कि तुम्हारे भाग्य में लौकिक सुख नहीं है। पार्वती जब शिव की बात नहीं मानी तब भगवान शिव ने अपनी माया से लंका नगरी का निर्माण किया और उसमें सोने का महल बनवाया। रावण ने जब महल को देखा तो उसके मन उसे पाने की लालसा जगी और गृह प्रवेश की पूजा के बदले दक्षिणा स्वरूप शिव जी से लंका नगरी मांग लिया।
रावण ने भगवान शिव के लिए भवन का निर्माण नहीं करवाया था। जबकि इस धारावाहिक में दिखाया गया है कि रावण ने शिव के लिए सोने का नगर बनवाया। देवों के देव महादेव में ऐसे कई प्रसंग हैं जिनका पुराणों में कहीं उल्लेख नहीं है। शिव पुराण में भगवान विष्णु की स्मृति लोप होने का वर्णन भी कहीं नहीं है जैसे इन दिनों इस सीरियल में दिखाया जा रहा है।
पण्डित जय गोविंद शास्त्री की तरह पण्डित विनोद त्यागी का भी मानना है कि देव देवों के देव महादेव में इंटरटेनमेंट के नाम पर शास्त्रों और पुराणों के साथ जबरदस्त छेड़-छाड़ हो रही है। दूसरी ओर, पण्डित केवल आनंद जोशी का कहना है कि पुराणों से बाहर भी कई लोक कथाएं हैं संभवतः इन्हीं को आधार बनाकर इस सीरियल में कई प्रसंगों को जोड़ा गया है। सभी जानते हैं कि लोक कथाओं में मनोरंजन, कल्पना और रोचकता का समावेश करने के लिए मनगढ़ंत बातें भी कही जाती हैं। उन कथाओं को शास्त्रीय प्रमाण नहीं कहा जा सकता है।