सरस्वती थोड़ी देर से पहुंची। लेकिन यज्ञ में अपनी जगह पर किसी और स्त्री को देखकर वह क्रोधित हो गई। उन्होंने ब्रह्माजी को श्राप दिया कि आज से इस पृथ्वी लोक में तुम्हारी कहीं पूजा नहीं होगी। पृथ्वीवासी तुम्हें भूल जाएंगे। सरस्वती के इस रूप को देखकर सभी देवता डर गए। उन्होंने उनसे विनती की कि अपना श्राप वापिस ले लीजिए, लेकिन वो नहीं मानी। जब गुस्सा ठंडा हुआ तो सरस्वती ने कहा कि इस धरती पर सिर्फ पुष्कर में ही आपकी पूजा होगी। कोई भी दूसरा मंदिर बनाएगा तो उसका विनाश हो जाएगा। ब्रह्मा जी वो देवता है जिनके चार हाथ हैं। इन चारों हाथों में आपको चार किताबें देखने को मिलती है। ये चारों किताब चार वेद हैं, वेद का मतलब ज्ञान होता है, पद्म पुराण में कहा गया है कि ब्रह्मा इस स्थान पर दस हजार साल रहे थे, इन सालों में उन्होंने पूरी सृष्टि की रचना की थी, जिन पाँच दिनो में ब्रह्माजी ने यहाँ यज्ञ किया था वो कार्तिक महीने की एकादशी से पूर्णिमा तक का वक्त था, हर साल इसी महीने में यहाँ इस मेले का आयोजन होता है, हर साल एक विशेष गूंज कार्तिक के इन दिनों में यहाँ सरोवर के आस-पास सुनाई पड़ती है जिसकी पहचान कुछ आध्यात्मिक गुरूओं को है । ये शक्तियां उस ब्रह्मा की उपासना के लिए आती हैं जिनकी वजह से इस दुनिया का वजूद है इस दौरान सरोवर के पानी में एक ऐसी आध्यात्मिक शक्ति का जिक्र है जिससे सारे रोग दूर हो जाते हैं।