अगर आप अपने जीवनसाथी से प्यार करते हैं और चाहते हैं कि दोनों का साथ हमेशा के लिए बना रहे तो इस सावन के शुरु होते ही प्रत्येक मास की कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को जीवनसाथी के साथ नहीं सोएं।
ऐसा हमारा नहीं शास्त्रों का कहना है। शास्त्रों के अनुसार मार्गशीर्ष कृष्ण द्वितीया तिथि से अशून्य शयन व्रत आरंभ होता है। इस वर्ष यह व्रत 5 जुलाई से शुरू हो रहा है और 30 नवम्बर को समाप्त होगा। इस दौरान कृष्ण पक्ष की पांच द्वितीया तिथियां पड़ेंगी।
शास्त्रों के अनुसार पति-पत्नी को मिलकर इस व्रत का पालन करना चाहिए। इससे जीवनसाथी की असामयिक मृत्यु नहीं होती है और वियोग नहीं सहना पड़ता है। इससे दाम्पत्य जीवन में प्यार भी बढ़ता है।
व्रत का नियम यह है कि पति-पत्नी को इस दिन प्रातः स्नान करके भगवान विष्णु और लक्ष्मी माता की पूजा करनी चाहिए। व्रत करने वाले को अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए। इस व्रत में दिन भर मौन रहने का भी नियम है।
शाम के समय व्रत करने वाले को पुनः विष्णु और लक्ष्मी की पूजा करके उन्हें शैय्या पर सुलाना चाहिए और चन्द्रमा को आर्घ्य देने के पश्चात भोजन करना चाहिए।
रात्रि के समय पति-पत्नी अलग-अलग शैय्या पर सोएं। इसी प्रकार से अन्य मास की कृष्ण पक्ष की द्वितीया को व्रत के नियम का पालन करें।
मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की द्वितीया को व्रत करने के बाद तृतीया तिथि को ब्रह्मण को भोजन कराएं और मीठे फल देकर उनका आशीर्वाद लें। इस तरह से व्रत पूरा होता है और जीवनसाथी पर आने वाली विपदा टल जाती है।