कोविड-19 के चलते श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने आम जनता के लिए मंदिर में प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध में ढील देने का फैसला लिया है। रविवार को मंदिर प्रशासन ने यह निर्णय लिया है कि 21 जनवरी से मंदिर में प्रवेश पाने के लिए श्रद्धालुओं को अपनी कोविड-19 जांच रिपोर्ट पेश करने की जरूरत नहीं है।
इस महीने की 21 तारीख से कोरोना जांच रिपोर्ट के बिना मंदिर में प्रवेश कर सकेंगे। इसके अलावा मंदिर में आने वाले बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए जल्द ही विशेष व्यवस्था शुरू की जाएगी। आपको बता दें कि कोरोना महामारी के चलते नौ महीने तक बंद रहने के बाद 3 जनवरी से मंदिर जनता के लिए खोला गया।
जगन्नाथ मंदिर की खास बातें
श्री जगन्नाथ मंदिर ओडिशा के तटवर्ती शहर पुरी में स्थित है। यह विश्व प्रसिद्ध मंदिर भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण को समर्पित है। हिन्दू धर्म की आस्था का यह महत्वपूर्ण केन्द्र है जिसे चार धामों में से एक माना जाता है। 800 साल से भी ज्यादा पुराने इस पवित्र मंदिर में हर साल लाखों श्रद्धालु पूरी दुनिया से भगवान के दर्शन के लिए आते हैं।
चोडगंग देव ने कराया था मंदिर निर्माण का आरंभ
मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण कार्य कलिंग राजा अनन्तवर्मन चोडगंग देव ने शुरू कराया था। मंदिर के जगमोहन और विमान भाग इन्हीं के शासन काल में बने थे। इसके बाद ओडिआ शासक अनंग भीम देव ने इस मंदिर को वर्तमान रूप दिया था।
नील माघव के नाम से पहले पूजे जाते थे श्री जगन्नाथ
श्री जगन्नथपुरी को पहले नील माघव के नाम से पूजा जाता था। नील माघव भील सरदार विश्वासु के आराध्य देव थे। करीब हजारों वर्ष पहले भील सरदार विष्वासु नील पर्वत की गुफा में ये पूजा किया करते थे।
जगन्नाथपुरी की वार्षिक यात्रा है प्रसिद्ध
इस मंदिर की वार्षिक रथ यात्रा पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। मध्य काल से ही यह उत्सव बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता रहा है। इसमें मंदिर के तीनों मुख्य देवता, भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और भगिनी सुभद्रा तीनों की ही तीन अलग-अलग भव्य और सुसज्जित रथ यात्रा निकाली जाती है।