आस्था का लोकपर्व छठ देश-विदेश में खुशी और उल्लास के साथ मनाया गया। महिलाओं ने भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया और छठी माता की पूजा कर अपने परिवार और देश की कुशलता की कामना की। जिस भव्यता के साथ भारत के कोने-कोने में छठ मनाया गया, ठीक उसी भव्यता और उमंग के साथ सात समंदर दूर अमेरिका में भी महिलाओं ने छठ पूजा किया और भगवान भास्कर को अर्घ्य देकर छठी मैया से आशीर्वाद मांगा।
अमेरिकी मीडिया के अनुसार, न्यूजर्सी के मोनरो स्थित थॉमसन पार्क में छठ पूजा मनाई गई। इस दौरान अमेरिका में बसे भारतीयों ने भगवान सूर्य अर्घ्य दिया। अमेरिकी शहर एडिसन में 19 नवंबर की सुबह उगते को अर्घ्य दिया गया। भारतीय मूल के लगभग 2000 लोग उगते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए घाट पहुंचे थे।
अमेरिका में यह संगठन कराते हैं छठ का आयोजन
अमेरिका के बिहार झारखंड एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका और बिहार फाउंडेशन की यूएस टीम के तत्वाधान में अमेरिका में हर साल छठ का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा, अमेरिका के सबसे बड़े भारतीय संगठन द फेडरेशन ऑफ इंडियन एसोसिएशन (एफआईए) की भी महापर्व के आयोजन में बड़ी भूमिका रहती है।
छठ पूजा का इतिहास
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पूजा की शुरुआत महाभारत काल से मानी जाती है। दौपदी और पांडवों ने छठ पूजा का व्रत रखा था। उन्होंने अपने राज्य को वापस पाने के लिए यह व्रत रखा था। जब पांडव सारा राजपाठ जुए में हार गए, तब द्रौपदी ने छठ व्रत रखा था। इस व्रत से उनकी मनोकामना पूरी हुई थी और पांडवों को सब कुछ वापस मिल गया, इसलिए छठ के मौके पर सूर्य की पूजा फलदायी माना जाता है। इसके अलावा यदि नि: संतान महिलाएं यह पूजा करती हैं, तो उन्हें संतान की प्राप्ति होती है। इस बात बात का प्रमाण है कि छठ पूजा की शुरुआत बिहार के मुंगेर जिले से हुई थी।
परिवार और संतान की लंबी उम्र की कामना
इस दिन व्रत रखने वाले लोग अपने परिवार और बच्चों की लंबी उम्र की प्रार्थना करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से छठी माता व्रत करने वाले लोगों के परिवार और संतान को लंबी आयु और सुख समृद्धि का वरदान देती हैं